बठिंडा के फ्लिपकार्ट गोदाम में चोरी, 4.5 करोड़ के मोबाइल लेकर फरार हुए चोर
फ्लिपकार्ट गोदाम से 4.5 करोड़ के मोबाइल गायब
बठिंडा: पंजाब के बठिंडा जिले की भुच्चो मंडी में फ्लिपकार्ट के गोदाम से करोड़ों रुपये के मोबाइल फोन चोरी होने का मामला सामने आया है। भुच्चो कैंचियां रोड स्थित गोदाम से सैमसंग कंपनी के करीब 980 मोबाइल गायब बताए गए हैं। इनकी कीमत लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया है। चोर गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने वाला डीवीआर भी ले गए। सूचना के बाद पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर पड़ताल शुरू की।
गोदाम से जुड़े कर्मचारियों को शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिली। शुरुआती विवरण के अनुसार, रात में गोदाम पर काम चल रहा था और कर्मचारी तड़के वहां से निकले थे। सुबह लौटने पर शटर की स्थिति देखकर उन्हें संदेह हुआ। अंदर पहुंचकर जांच की गई तो बड़ी संख्या में मोबाइल फोन गायब मिले। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। चोरी का सही समय और घटनाक्रम स्पष्ट करने के लिए उस रात की गतिविधियों का क्रम महत्वपूर्ण होगा।
गोदाम के मैनेजर प्रकाश के अनुसार, कर्मचारी रात करीब ढाई बजे माल की डिलीवरी लेकर निकले थे। सुबह लगभग पांच बजे वापस आने पर शटर का ताला गायब मिला और शटर ऊपर उठा हुआ था। अंदर रखे सामान की जांच के दौरान मोबाइल चोरी होने का पता चला। यह समय कर्मचारियों के बयान पर आधारित है; चोर कब पहुंचे और कितनी देर भीतर रहे, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में गोदाम का कामकाज कुछ समय पहले ही शुरू होने की जानकारी दी गई है। उसी रिपोर्ट में चोरी हुए मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 4.57 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, नुकसान की अंतिम राशि स्टॉक रिकॉर्ड, फोन के मॉडल और संबंधित बिलों के मिलान से स्पष्ट होगी। फिलहाल लगभग 980 फोन गायब होने का शुरुआती आंकड़ा सामने आया है। इसे जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्यापित सूची नहीं माना जा सकता। डीवीआर का गायब होना मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। इसमें कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है, जिससे किसी परिसर में आने-जाने वालों और घटनाक्रम की जानकारी मिल सकती है। इसे साथ ले जाने से गोदाम की रिकॉर्डिंग हासिल करने में बाधा आ सकती है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि घटना से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य नष्ट हो गए हैं। अन्य रिकॉर्डिंग या बैकअप उपलब्ध हैं अथवा नहीं, इस बारे में अभी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
घटना की सूचना पर स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी गुरप्रीत सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद डीएसपी साइबर सरबजीत सिंह और डीएसपी संदीप सिंह ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मोबाइल फॉरेंसिक लैब की टीम ने परिसर में सुराग जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। उपलब्ध जानकारी में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या चोरी हुए फोन की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है। jagran.com
पड़ताल के दौरान कंपनी के कर्मचारियों से भी जानकारी ली गई। अधिकारियों को कंपनी के कानूनी प्रतिनिधियों की टीम का इंतजार था। बड़ी संख्या में फोन गायब होने के कारण संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध स्टॉक का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि कौन-कौन से मॉडल गायब हैं और उनकी वास्तविक संख्या कितनी है। कंपनी की ओर से नुकसान का विस्तृत सार्वजनिक विवरण उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
मामले में कई प्रश्नों के उत्तर अभी बाकी हैं। वारदात में कितने लोग शामिल थे, मोबाइल किस तरह बाहर ले जाए गए और आरोपियों ने आने-जाने के लिए कौन-सा साधन इस्तेमाल किया—इन बिंदुओं पर कोई प्रमाणित विवरण सामने नहीं है। इतनी बड़ी चोरी को केवल सामान की संख्या के आधार पर किसी विशेष गिरोह से जोड़ना जल्दबाजी होगी। इसी तरह बिना साक्ष्य किसी कर्मचारी की मिलीभगत का आरोप लगाना भी उचित नहीं है।
घटना ने महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान वाले गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था का विषय सामने रखा है। ऐसे परिसरों में सामान का रिकॉर्ड, प्रवेश की व्यवस्था और निगरानी उपकरणों का रखरखाव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। किसी वस्तु के गायब होने पर सही स्टॉक विवरण नुकसान का आकलन करने में मदद करता है। इस मामले में कौन-सी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी और उसका पालन किस तरह हो रहा था, इसका विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष अभी उपलब्ध नहीं है। चोरी का पता चलने और वास्तविक घटना के समय में अंतर भी ध्यान देने योग्य है। कर्मचारियों ने सुबह गायब सामान देखा, लेकिन इससे चोरी की सटीक घड़ी तय नहीं होती। घटनास्थल से मिले सुराग और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान आवश्यक होगा। डीवीआर ले जाने को रिकॉर्डिंग छिपाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन आरोपियों की पहचान और उनके उद्देश्य पर अंतिम निष्कर्ष जांच से ही निकलेगा।
फिलहाल पुलिस का ध्यान आरोपियों तक पहुंचने और चोरी हुए मोबाइलों की बरामदगी पर है। फॉरेंसिक पड़ताल तथा गोदाम के रिकॉर्ड से आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह करोड़ों रुपये के मोबाइल चोरी होने का मामला है, जिसमें नुकसान और गायब सामान की अंतिम सूची का सत्यापन बाकी है। गिरफ्तारी, बरामदगी अथवा किसी नेटवर्क से संबंध स्थापित होने पर ही वारदात की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।