भगवंत मान को 'एंटी-गुरु' घोषित किए जाने पर SGPC की प्रतिक्रिया, कानून में संशोधन पर उठाए सवाल
Punjab पंजाब: मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को अकाल तख्त द्वारा कथित रूप से 'एंटी-गुरु' घोषित किए जाने के मुद्दे पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। एसजीपीसी के अधिवक्ता Amanvir Singh Siali ने कहा कि अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा घोषित निर्णय दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित है।
अमनवीर सिंह सियाली ने कहा कि पहला मुद्दा पंजाब सरकार द्वारा जगत ज्योत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम में किए गए संशोधनों से जुड़ा है। उनके अनुसार, अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने यह टिप्पणी की कि इन संशोधनों को लागू करने से पहले न तो श्री अकाल तख्त साहिब से और न ही एसजीपीसी से कोई परामर्श किया गया।
उन्होंने कहा कि सिख धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं से जुड़े किसी भी कानून में बदलाव से पहले संबंधित धार्मिक संस्थाओं से चर्चा और सहमति आवश्यक है। इसी कारण जत्थेदार ने इन संशोधनों पर पुनर्विचार और आवश्यक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है।
एसजीपीसी का मानना है कि गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा और सम्मान से जुड़े मामलों में धार्मिक संस्थाओं की भूमिका सर्वोपरि होनी चाहिए। ऐसे विषयों पर सरकार और धार्मिक संगठनों के बीच समन्वय बनाए रखना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
इस मुद्दे को लेकर पंजाब की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में इस विषय पर अकाल तख्त, एसजीपीसी और राज्य सरकार के बीच संवाद की संभावना जताई जा रही है।