चंडीगढ़ : 3 नवंबर 2026। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। चन्नी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और प्रदेश एक तरह से 'पुलिस स्टेट' बन गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के हित में आम आदमी पार्टी की सरकार को जितनी जल्दी सत्ता से हटाया जाए, उतना ही बेहतर होगा। उनके इस बयान से राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।चरणजीत सिंह चन्नी ने आरोप लगाया कि पंजाब में गुंडागर्दी, गैंगस्टर गतिविधियां और नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इसके लिए मौजूदा सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। चन्नी का कहना है कि जनता ने आम आदमी पार्टी को बेहतर शासन, भ्रष्टाचार से मुक्ति और कानून-व्यवस्था सुधारने की उम्मीद से सत्ता सौंपी थी, लेकिन सरकार इन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है।पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में आम नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार कानून-व्यवस्था सुधारने के दावे कर रही है, तब अपराध और नशे को लेकर लगातार शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं।
चन्नी ने पंजाब में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, प्रशासन का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ऐसी स्थिति बन रही है, जहां लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासनिक दबाव अधिक दिखाई देता है।हालांकि, चन्नी के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं। राज्य में अपराध और नशे की वास्तविक स्थिति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा स्वतंत्र जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।चन्नी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही है। पार्टी 4 नवंबर को संगरूर में बड़ी 'इंसाफ रैली' आयोजित करने जा रही है। इस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के शामिल होने का कार्यक्रम है।कांग्रेस इस रैली के माध्यम से पंजाब की कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, बेरोजगारी, किसानों की परेशानियों और राज्य सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।पंजाब कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि संगरूर की रैली केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने का मंच होगी। पार्टी की रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की है।
चरणजीत सिंह चन्नी पिछले कुछ समय से लगातार भगवंत मान सरकार को घेर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने पंजाब में नशे के कारोबार, कथित भ्रष्टाचार, अवैध खनन और अपराध की घटनाओं को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए थे।अक्टूबर के अंत में जालंधर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चन्नी ने दावा किया था कि पंजाब में नशीले पदार्थों का कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया था कि नशे के बड़े नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय छोटे स्तर के मामलों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।इसके साथ ही उन्होंने बेरोजगारी और उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई थी। चन्नी का तर्क था कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से युवाओं के सामने कठिनाइयां बढ़ रही हैं।पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य राजनीतिक दल इस समस्या से निपटने के लिए समय-समय पर अलग-अलग योजनाओं और उपायों की बात करते रहे हैं।आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी नशे और अपराध के खिलाफ अभियान चलाने तथा कानून-व्यवस्था मजबूत करने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
चन्नी ने इससे पहले पंजाब में प्रशासनिक फैसलों पर कथित बाहरी प्रभाव का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य के कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों पर दिल्ली से जुड़े व्यक्तियों का प्रभाव है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सितंबर में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी मुलाकात की थी। उस दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की थी और सरकार के कामकाज को लेकर शिकायतें रखी थीं।कांग्रेस नेताओं ने उस मुलाकात के दौरान दावा किया था कि राज्य में आपराधिक गतिविधियों के कारण आम लोगों की चिंता बढ़ रही है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, नशा और आर्थिक स्थिति प्रमुख चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। कांग्रेस इन विषयों पर लगातार सरकार को घेर रही है, जबकि आम आदमी पार्टी अपने शासनकाल की उपलब्धियों और योजनाओं के आधार पर जनता के बीच जाने की तैयारी में है।संगरूर की प्रस्तावित रैली को भी कांग्रेस के चुनावी अभियान की महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन को मजबूती देने का प्रयास किया जाएगा।फिलहाल चरणजीत सिंह चन्नी के तीखे बयान ने पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उनकी ओर से लगाए गए 'पुलिस स्टेट' के आरोप और आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने की अपील ने दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव को और स्पष्ट कर दिया है।अब सबकी निगाहें कांग्रेस की संगरूर रैली और उसके बाद होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस के आरोपों पर आम आदमी पार्टी किस तरह जवाब देती है और राज्य की जनता आगामी चुनावों में किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्व देती है।