महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद तख्त हजूर साहिब बोर्ड को बहाल कर दिया है, जिससे 2022 में बोर्ड के विघटन के बाद सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक द्वारा प्रशासन की अवधि समाप्त हो गई है। एचसी की औरंगाबाद खंडपीठ ने बोर्ड को बहाल करने के लिए सरकार को 28 अक्टूबर की समय सीमा तय की थी और अनुपालन न करने की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी दी थी। अदालत के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, सरकार ने नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड और उसके नौ सदस्यीय बोर्ड को बहाल करने के लिए एक नई अधिसूचना जारी की, जो इसके विघटन से पहले मौजूद थी।
हालाँकि, यह पता चला है कि बोर्ड अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मिन्हास का निधन हो गया है। शेष आठ सदस्यों के कार्यभार ग्रहण करने की उम्मीद है। वे हैं गुरिंदर सिंह बावा (उपाध्यक्ष), रविंदर सिंह भुंगई (सचिव), गोबिंद सिंह लोंगोवाल (पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष), रघुजीत सिंह विर्क (एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष), परमजोत सिंह चहल, गुरमीत सिंह महाजन, हरपाल सिंह भाटिया और मनप्रीत सिंह कुंजीवाले।
भुंगई और चहल ने बोर्ड को भंग करने और प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी, जिससे लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। बहाली को एक ऐतिहासिक विकास बताते हुए, भुंगई ने कहा कि बोर्ड में एक बार फिर गवर्निंग एक्ट के तहत चुने गए सदस्य शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह 'नानक नाम लेवा' संगत के लिए एक ऐतिहासिक जीत है। सरकार के अनुचित हस्तक्षेप से तख्त की स्वायत्त स्थिति कम हो गई थी जब उसने निर्वाचित सदस्यों वाले बोर्ड को भंग कर दिया और तख्त के मामलों को चलाने के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया। हम जल्द ही तख्त के प्रशासन को संभालने और सुव्यवस्थित करने के लिए एक बैठक बुलाएंगे, खासकर हमारे अध्यक्ष के निधन के मद्देनजर।" तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब लगभग सात दशकों से नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956 के तहत शासित है। अधिनियम में तख्त और महाराष्ट्र में संबंधित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रशासन के लिए 17 सदस्यीय बोर्ड का प्रावधान है, लेकिन 2022 में बोर्ड में केवल नौ सदस्य शामिल थे।