पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा सेवानिवृत्ति की आयु के बाद उनकी पुनर्नियुक्ति पर रोक लगाने के दो सप्ताह बाद, डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को पीजीआईएमएस, रोहतक के निदेशक के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. मदन गोपाल वशिष्ठ को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद राज्यपाल प्रोफेसर अशीम कुमार घोष ने सोमवार शाम को इस आशय की अधिसूचना जारी की।
डॉ. वशिष्ठ के पास चिकित्सा और शैक्षणिक क्षेत्रों में 35 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दो बार पीजीआईएमएस, रोहतक के चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्य किया है और डीन, छात्र कल्याण का पद भी संभाला है। कार्यभार संभालने के बाद डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि मरीजों की देखभाल में सुधार, अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत करना और चिकित्सा शिक्षा के मानकों को ऊपर उठाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान पर अधिक जोर देने से बेहतर उपचार प्रोटोकॉल विकसित करने, नैदानिक परिणामों में सुधार करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को मुफ्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हर विभाग में मरीज की संतुष्टि सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देते हुए मरीजों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाएगा। बाद में, डॉ. वशिष्ठ ने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक (यूएचएसआर) के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल से मुलाकात की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय क़ानून के खंड 3(1)(ई) के तहत 65 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा में छूट देते हुए 13 अगस्त से तीन साल के कार्यकाल के लिए डॉ. सिंघल को पीजीआईएमएस का निदेशक नियुक्त किया था।
नियुक्ति को इस आधार पर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई कि यह अवैध और मनमाना है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि डॉ. सिंघल ने 31 जुलाई, 2026 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली थी, और परिणामस्वरूप वह क़ानून 3(1)(ई) के तहत पद पर बने रहने के लिए अयोग्य थे, जो कि 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद पद समाप्ति का प्रावधान करता है, और किसी भी छूट का प्रावधान नहीं करता है।