चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने के आदेश के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया के सामने जारी किए गए एक वीडियो संदेश में रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए उन्हें "बेईमान मान" कहा। यह टिप्पणी उनका राजनीतिक बयान है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर जो सवाल उठाए जाते रहे, अब अदालत के आदेश के बाद वे और गंभीर हो गए हैं।वीडियो संदेश में बिट्टू ने कहा, **"उनकी असलियत पूरी तरह सामने आने में पांच साल लग गए। भगवंत मान अब 'मान साहब' नहीं रहे। अब उन्हें 'बेईमान मान' के नाम से जाना जाएगा। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ; पंजाब CMO में ऐसा पहली बार हो रहा है।"**
भाजपा नेता ने कहा कि इस पूरे मामले को केवल मुख्यमंत्री के OSD पर लगे आरोपों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह मामला सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए अदालत को CBI जांच का आदेश देना पड़े, तो यह सरकार के लिए गंभीर विषय है।
बिट्टू ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा करती रही है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम उन दावों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और जांच पूरी होने तक पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत के आदेश के बाद विपक्षी दल राज्य सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
हालांकि अदालत का आदेश जांच से संबंधित है और इसका अर्थ किसी व्यक्ति के दोषी होने का निष्कर्ष नहीं है। जांच एजेंसी अब आरोपों की जांच करेगी और उसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल मामले में जांच जारी रहना बाकी है।रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने बयान में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुख्यमंत्री कार्यालय जैसी संस्था की साख बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने दावा किया कि यदि मुख्यमंत्री के निकट कार्य करने वाले अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप लगते हैं, तो सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। भाजपा नेता के अनुसार, जनता पारदर्शी और जवाबदेह शासन की अपेक्षा करती है।दूसरी ओर, इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि वह कानून का सम्मान करती है और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। मामले की जांच अब CBI के पास रहने के कारण आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू का बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखे शब्दों में हमला करते हुए कहा कि यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय की साख से जुड़ा मुद्दा है।फिलहाल मामले में CBI जांच शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आरोपों की सत्यता और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।