Punjab.पंजाब: महाराजा रणजीत सिंह का ऐतिहासिक महल दीनानगर में धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा है। यह स्मारक सिक्ख साम्राज्य के गौरवशाली अतीत का प्रतीक है, लेकिन अब यह संरक्षित न होने और उपेक्षा का शिकार हो रहा है। स्थानीय इतिहासकार और नागरिक इस स्थिति को गंभीर मानते हैं और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
महल की दीवारों में दरारें और छतों में गिरावट के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। कुछ हिस्सों में बारिश और मौसम की मार के कारण संरचना को गंभीर नुकसान हुआ है। स्मारक के परिसर में कूड़ा और घास भी बढ़ती जा रही है, जिससे ऐतिहासिक स्थल की गरिमा पर असर पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह महल केवल स्थापत्य और ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यटन और शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इतिहासकार डॉ. सतीश कुमार का कहना है कि महाराजा रणजीत सिंह का यह महल सिक्ख साम्राज्य की समृद्धि और दीनानगर की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह महल 19वीं सदी का है और इसे संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। “यदि इसे तुरंत संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में यह पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है,” उन्होंने चेतावनी दी।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन भी महल के संरक्षण के लिए आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग से अपील की है कि इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए और मरम्मत तथा संरक्षण के लिए फंड प्रदान किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि महल की मरम्मत न केवल ऐतिहासिक संरक्षण के लिए बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी जरूरी है।
हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि महल की स्थिति का आकलन किया जा रहा है, लेकिन लंबी प्रक्रिया और फंड की कमी के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यह ऐतिहासिक स्थल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में भी इस मुद्दे पर काफी चर्चा हो रही है। कई नागरिक और इतिहास प्रेमी इसे ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा का मामला मान रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस आंदोलन का समर्थन करें और सरकार से जवाबदेही की मांग करें।