Punjab.पंजाब: पुराने लोग याद करते हैं कि गुरदासपुर ने आज़ादी के बाद की सबसे भयानक बाढ़ देखी थी। रावी, उझ और चक्की नदियों में पानी का स्तर 1988 के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा था। किसान नेताओं का दावा है कि पंजाब की एक-तिहाई धान की फ़सल बर्बाद हो गई है। घटते पानी के कारण कृषि भूमि गेहूँ की बुवाई के लिए भी अनुपयुक्त हो गई है। किसान नेता 70,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवज़ा और पूरी कर्ज़ माफ़ी की माँग कर रहे हैं। जानकार लोगों का कहना है कि किसानों को उनकी माँग पूरी नहीं होगी।
ज़्यादातर किसान पहले से ही कर्ज़ में डूबे हुए हैं और ऐसी ख़बरें हैं कि कई जगहों पर किसानों में आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित हो गई है। बारिश के बाद कई सड़कें, निचले इलाके और खेत जलमग्न हो गए हैं। राजनेता किसानों से मिलने के लिए तांता लगाए बैठे हैं, लेकिन दिखावटी बयानबाज़ी के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। शहर में भी मौसम विभाग की अपेक्षा से ज़्यादा बारिश हुई है। दुकानदारों को भारी नुकसान हुआ है। स्कूल और कॉलेज लंबे समय तक बंद रहे और कई संस्थानों को ऑनलाइन कक्षाओं का सहारा लेना पड़ा।