जालंधर : पंजाब में खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में एनालॉग यानी नकली या नॉन-डेयरी पनीर के उत्पादन, बिक्री और भंडारण पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने की तैयारी की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एनालॉग पनीर असली दूध से बने पनीर की तरह दिखता है, लेकिन इसमें दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऐसे उत्पादों को असली पनीर के नाम पर बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।
होटल, रेस्टोरेंट और दुकानदारों पर भी लागू होंगे नियम
प्रतिबंध के दायरे में पनीर बनाने वाली इकाइयों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग संचालक और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान भी आएंगे। यदि कोई संस्था एनालॉग पनीर का इस्तेमाल या बिक्री करती पाई गई तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में सामने आई थीं मिलावट की शिकायतें
खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार पनीर और डेयरी उत्पादों के सैंपल की जांच कर रहा है। कई राज्यों में निरीक्षण के दौरान ऐसे उत्पाद सामने आए हैं, जिनमें दूध की जगह अन्य वसा और सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सरकारों ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा को देखते हुए सख्त कदम उठाने शुरू किए हैं।
उल्लंघन करने पर जब्ती और जुर्माना
नियमों का पालन नहीं करने वाले कारोबारियों के खिलाफ उत्पाद जब्त करने, बिक्री रोकने और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों में जांच अभियान चलाकर ऐसे उत्पादों पर नजर रखेंगे।
उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
सरकार का उद्देश्य बाजार में असली और गुणवत्तापूर्ण पनीर उपलब्ध कराना है। प्रतिबंध लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को नकली या कम गुणवत्ता वाले पनीर से राहत मिलने की उम्मीद है। खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, असली पनीर दूध से तैयार होता है और इसमें दूध की प्राकृतिक गुणवत्ता होती है, जबकि एनालॉग पनीर सस्ता विकल्प होने के कारण कई जगहों पर इस्तेमाल किया जाता है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए निगरानी बढ़ाएगा।

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