मानसा। पंजाब के मानसा जिले में परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। मंगलवार को शहर के त्रिकोणी चौक पर झोटा संघर्ष कमेटी की ओर से लगाए गए धरने के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, मानसा के कोट धरमु पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले युवक का शव प्रदर्शन स्थल पर लाया गया था। इसके बाद धरनास्थल पर तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए शाम के समय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए कथित तौर पर बल प्रयोग किया। हालांकि, इस विशेष लाठीचार्ज, मृत युवक की पहचान और पुलिस कार्रवाई में घायल लोगों की संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
त्रिकोणी चौक पर प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव
मानसा शहर का त्रिकोणी चौक पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां परविंदर सिंह झोटा संघर्ष कमेटी और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता न्याय की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान एक अन्य युवक का शव लाए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि युवक मानसा जिले के कोट धरमु पुलिस चौकी क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला था और उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी।शव धरनास्थल पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों में आक्रोश बढ़ने की बात कही जा रही है।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कथित तौर पर लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई के कारणों और घटनाक्रम को लेकर पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
13 अक्टूबर को हुई थी परविंदर सिंह झोटा की हत्या
मानसा में जारी विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद हुई थी।परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से पंजाब में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, मानसा के एक बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर पर विवाद के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी।इस गोलीबारी में परविंदर सिंह की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे।घटना के बाद उनके परिवार और समर्थकों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी।इसके बाद मानसा के सिविल अस्पताल और त्रिकोणी चौक पर लगातार धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
सीबीआई जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में गठित इंसाफ कमेटी कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रही है।प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना शामिल है।परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।इसके अलावा घायल व्यक्तियों के लिए मुआवजा, बेहतर उपचार की व्यवस्था और परविंदर सिंह झोटा की स्मृति में सुविधाएं विकसित करने की मांग की गई है।मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बावजूद परिवार और संघर्ष कमेटी की सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है।
सरकार और संघर्ष कमेटी के बीच बातचीत बेनतीजा
मानसा में लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए पंजाब सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की थी।समिति और संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।23 अक्टूबर को आयोजित तीसरी बैठक में भी सभी मांगों पर सहमति नहीं बन पाई थी।सरकारी पक्ष की ओर से कुछ मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी शेष मांगों पर अड़े रहे।परविंदर सिंह झोटा के परिवार ने सभी प्रमुख मांगों के समाधान तक पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के संबंध में सहमति नहीं देने का रुख अपनाया था।
पुलिस अधिकारियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
झोटा हत्याकांड को लेकर उठे सवालों के बीच पंजाब सरकार ने कुछ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।रिपोर्टों के मुताबिक, मानसा के डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और एक ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया था।इससे पहले सिटी-2 थाने की एसएचओ इंस्पेक्टर बेअंत कौर को भी निलंबित किया गया था।हालांकि, इन कार्रवाइयों के बावजूद प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।संघर्ष कमेटी का कहना है कि मामले में जवाबदेही तय करने और उनकी मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसान और मजदूर संगठनों का भी मिला समर्थन
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में चल रहे आंदोलन को विभिन्न किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है।26 अक्टूबर को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब का एक जत्था मानसा में चल रहे धरने में शामिल हुआ था।इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।पंजाब के विभिन्न जिलों में भी झोटा हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए गए।25 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न झाड़ू को जलाकर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।
बाजार और आम लोगों पर भी पड़ा आंदोलन का असर
मानसा में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन का असर स्थानीय जनजीवन पर भी देखने को मिला है।त्रिकोणी चौक और सिविल अस्पताल के आसपास लगातार धरना होने से यातायात और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर परेशानियां सामने आई हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने सड़क बंद रहने के कारण कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई है।वहीं अस्पताल के आसपास प्रदर्शन और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से मरीजों को होने वाली असुविधा का मुद्दा भी उठाया गया है।प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों की आवाजाही और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
लाठीचार्ज के बाद पुलिस के पक्ष का इंतजार
मंगलवार की घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुलिस ने किन परिस्थितियों में कथित लाठीचार्ज किया और क्या इससे पहले प्रदर्शनकारियों को हटने की चेतावनी दी गई थी।इसके अलावा पुलिस कार्रवाई में कितने लोग घायल हुए और क्या किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, इसकी पुष्टि आवश्यक है।कोट धरमु चौकी क्षेत्र में मृत मिले युवक के मामले की जांच और उसके शव को धरनास्थल पर लाने की परिस्थितियां भी स्पष्ट होना बाकी हैं।इस युवक की मौत को परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड से जोड़ने वाला कोई पुष्ट साक्ष्य अभी सामने नहीं आया है।
मानसा में कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से मानसा लगातार राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है।एक ओर परिवार और समर्थक न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
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