चंडीगढ़: केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने धनास स्थित कच्ची कॉलोनी में बने कथित अवैध ढांचों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, दिवाली के बाद यहां अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाने की योजना है। करीब 10 से 12 एकड़ में फैली इस बस्ती में लगभग 800 अस्थायी मकान हैं। प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों को जगह खाली करने के नोटिस जारी किए जाने हैं। हालांकि, कार्रवाई की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है। 
इस खबर के साथ चंडीगढ़ की स्लम फ्री स्थिति का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन शहर की चिह्नित 19 झुग्गी बस्तियों को हटाने के बाद स्लम फ्री दर्जा हासिल करने का दावा कर चुका है। ऐसे में धनास की कार्रवाई को शहर को पहली बार यह दर्जा दिलाने की प्रक्रिया बताने के बजाय शेष कथित अवैध ढांचों के खिलाफ प्रस्तावित अभियान के रूप में देखा जा रहा है। धनास की बस्ती कृषि और गांव की साझा जमीन पर बसी बताई गई है। 
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन से जुड़े करीब सात किसानों और भू-स्वामियों की पहचान की गई है। प्रस्तावित अभियान में जमीन की स्थिति, वहां बने अस्थायी ढांचों और उन्हें खाली कराने की प्रक्रिया शामिल होगी। फिलहाल सामने आई सूचना तैयारी और नोटिस जारी करने की योजना से संबंधित है। इसे इस अर्थ में नहीं लिया जा सकता कि कॉलोनी खाली कराने की कार्रवाई शुरू हो गई है या वहां रहने वाले परिवारों को तत्काल हटाया जा रहा है।
धनास की कच्ची कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव नया नहीं है। अक्टूबर 2025 में भी दिवाली के बाद यहां अभियान चलाने की तैयारी की खबर सामने आई थी। उस समय संपदा विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि कृषि और शामलात जमीन पर बनी कॉलोनी के संबंध में कार्रवाई की योजना तैयार की जा रही है। राजस्व अधिकारियों और अतिक्रमण हटाने वाले दस्ते को अभियान की रूपरेखा बनाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी दी गई थी। इसलिए पुराने प्रस्ताव और अब सामने आई तैयारी के बीच अंतर रखना जरूरी है। 
इस मामले में जमीन मालिकों का पक्ष भी पहले सामने आ चुका है। वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ किसानों और भू-स्वामियों का कहना था कि उन्होंने लोगों को किराये पर अस्थायी निर्माण करके रहने दिया था। उन्होंने प्रशासन से लैंड पूलिंग नीति लाने की मांग की थी। स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी जमीन की प्रकृति और वहां रहने वाले परिवारों की स्थिति को देखते हुए कार्रवाई से पहले संबंधित मुद्दों का समाधान करने की बात कही थी। ये उस समय सामने आए पक्ष हैं; इन्हें ताजा प्रशासनिक आदेश का हिस्सा नहीं माना जा सकता। 
चंडीगढ़ में गांवों की जमीन और नियोजित विकास को लेकर लैंड पूलिंग की मांग अब भी चर्चा में है। ताजा रिपोर्ट में 22 गांवों के किसानों द्वारा लैंड पूलिंग नीति लागू करने, लाल डोरा व्यवस्था समाप्त करने और कृषि भूमि के मुआवजे से संबंधित गुणक बढ़ाने की मांग का उल्लेख है। किसानों का तर्क है कि गांव नगर निगम के अंतर्गत आने के बावजूद कृषि भूमि के उपयोग और नियोजित विकास के लिए स्पष्ट नीति की जरूरत बनी हुई है। 
प्रशासन इससे पहले शहर की कई बस्तियों में बड़े अभियान चला चुका है। पंजाबी ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 19 जून 2025 को सेक्टर 53 और 54 के बीच स्थित आदर्श कॉलोनी में कार्रवाई हुई थी। छह मई 2025 को सेक्टर 25 की जनता कॉलोनी में लगभग 2,500 ढांचे हटाए गए थे। इसके अलावा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की संजय कॉलोनी में भी करीब एक हजार झुग्गियां हटाने की कार्रवाई की गई थी। धनास की प्रस्तावित कार्रवाई इसी व्यापक प्रशासनिक पृष्ठभूमि में सामने आई है। 
धनास के मामले में आगे जारी होने वाले नोटिस महत्वपूर्ण होंगे। उनसे यह स्पष्ट होगा कि किन ढांचों को चिह्नित किया गया है, संबंधित लोगों को कितना समय दिया जाएगा और कार्रवाई का दायरा क्या रहेगा। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में प्रभावित परिवारों के लिए किसी नई पुनर्वास योजना या वैकल्पिक आवास आवंटन का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए सभी परिवारों को दूसरे स्थान पर बसाने अथवा किसी को पुनर्वास नहीं मिलने का निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।
फिलहाल प्रशासन की योजना दिवाली के बाद अभियान चलाने की है। अंतिम कार्यक्रम और नोटिस सामने आने के बाद ही कार्रवाई की समयसीमा स्पष्ट होगी। करीब 800 अस्थायी मकानों वाली इस बस्ती के मामले में जमीन के स्वामित्व, प्रशासनिक प्रक्रिया और निवासियों के आवास से जुड़े प्रश्न प्रमुख बने हुए हैं।
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