Punjab.पंजाब: कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार पंजाब में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी लोगों को नियुक्त करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि इसके पीछे पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू कराने की एक “सुनियोजित साजिश” छिपी हुई है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि BBMB, जो कि Bhakra Beas Management Board के अंतर्गत आता है, उसमें पंजाब के अधिकारों और हितों को दरकिनार किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार धीरे-धीरे पंजाब से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में स्थानीय भागीदारी को कम कर रही है और बाहरी अधिकारियों की तैनाती कर राज्य के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर Indian National Congress के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि Bharatiya Janata Party सरकार राज्यों के अधिकारों को सीमित कर केंद्र के नियंत्रण को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने दावा किया कि BBMB में हाल के दिनों में कुछ ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिनसे पंजाब के प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को कम किया गया है। उनका कहना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो यह राज्य की संघीय संरचना पर सीधा प्रहार होगा। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यह कदम आगे चलकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।
वहीं, कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित प्रक्रिया के जरिए पंजाब में ऐसी स्थिति बनाई जा रही है जिससे संवैधानिक तंत्र को कमजोर दिखाकर राष्ट्रपति शासन लागू करने का आधार तैयार किया जा सके। पार्टी ने इसे लोकतंत्र और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया है।
इस मुद्दे पर पंजाब के कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी चिंता जताई है और केंद्र सरकार से पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि BBMB जैसे महत्वपूर्ण संगठन में किसी भी तरह की नियुक्ति या बदलाव राज्य की सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।
हालांकि, अब तक केंद्र सरकार या बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर राज्य और केंद्र के बीच अधिकारों के संतुलन से जुड़ा है।
पंजाब में यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनता जा रहा है, और विपक्ष इसे एक बड़ा संघीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस पर संसद और राज्य स्तर पर भी तीखी बहस होने की संभावना है।