अमृतसर के बटाला में दिलप्रीत सिंह के गाँव के बच्चों का एक समूह, अपने पसंदीदा हॉकी खिलाड़ियों के पोस्टर थामे, पूरे उत्साह के साथ बर्लटन पार्क पहुँचा। इन पोस्टरों पर भारतीय हॉकी के सितारे नज़र आ रहे थे, जिनमें कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मनप्रीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, जरमनप्रीत सिंह, कृष्ण बी. पाठक और अन्य खिलाड़ी शामिल थे। दस साल की अगम इस बात को लेकर बहुत सतर्क थी कि पोस्टर कैसे पकड़े गए हैं। जब उसने एक और बच्चे को दिलप्रीत सिंह की तस्वीर पकड़े हुए देखा, तो उसने तुरंत उसे ठीक करने के लिए कहा। उसने कहा, "इसे ऐसे ठीक करो, जैसे मैंने हरमनप्रीत पाजी का पोस्टर पकड़ा है।" उसने उस बच्चे से कहा कि वह दिलप्रीत की तस्वीर को भी उतनी ही सावधानी से पकड़े, जितनी सावधानी से उसने हरमनप्रीत सिंह का पोस्टर पकड़ा हुआ था।
इनमें से कई बच्चों के लिए, यह अपने आदर्श खिलाड़ियों को किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलते देखने का पहला मौका था। इस अनुभव ने उन्हें उस दुनिया की एक झलक दिखाई, जहाँ वे एक दिन पहुँचना चाहते हैं—एक ऐसा अनुभव जो उनके नन्हे मन पर गहरी छाप छोड़ सकता है। राउंडग्लास अकादमी के कोच मेहर सिंह, जो इन बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं, ने बताया कि बच्चे अपने उत्साह को रोक नहीं पा रहे थे।
उन्होंने कहा, "खिलाड़ी बहुत उत्साहित हैं। वे अभी अपनी भावनाओं को मुश्किल से ही काबू कर पा रहे हैं।" तरनतारन के धोतियां गाँव से आए उभरते हॉकी खिलाड़ियों के समूह में भी ऐसा ही उत्साह देखने को मिला। शर्मीले स्वभाव और आँखों में उम्मीद की चमक लिए, ये नन्हे खिलाड़ी अपनी उम्र से कहीं बड़े सपने लेकर स्टेडियम पहुँचे।
साहिबप्रीत सिंह (11) का लक्ष्य बिल्कुल साफ था: वह एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहता है। उसने कहा, "मैंने पहले कभी भारतीय टीम के किसी खिलाड़ी को नहीं देखा है। आज मैं बहुत उत्साहित हूँ।" उसका यह उत्साह इस पल के महत्व को बखूबी बयां कर रहा था। मिठापुर गाँव के युवा हॉकी खिलाड़ी भी इस जगह पर पहुँचे। वे छह अंतरराष्ट्रीय टीमों के कप्तानों और खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए बहुत उत्सुक थे। जब वे स्टैंड की ओर जा रहे थे, तो हॉकी सितारों के पोस्टर पर नज़र पड़ते ही उनकी चाल धीरे हो जाती थी। वे उन तस्वीरों को हैरानी और प्रशंसा भरी नज़रों से देखने के लिए रुक गए, मानो वे खुद को किसी दिन उन्हीं तस्वीरों के फ्रेम में देखने की कल्पना कर रहे हों।
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