मतदाता सूची पर सवाल उठाने वाले दल बताएं कितनी आपत्तियां दर्ज कराईं: सुनील जाखड़
चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सवाल उठाए हैं। जाखड़ ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका जताने वाले राजनीतिक दलों से पूछा है कि अगर उन्हें प्रक्रिया पर संदेह था तो उन्होंने निर्धारित व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारियों के सामने कितनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
जाखड़ ने कहा कि पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई है। बूथ स्तर के अधिकारियों यानी बीएलओ ने घर-घर जाकर सत्यापन किया और इसके बाद दावे तथा आपत्तियां लेने की प्रक्रिया भी चली। ड्राफ्ट मतदाता सूची भी जारी की गई। ऐसे में अब प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने तय समय के भीतर कितनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के समक्ष दर्ज कराईं।
पंजाब में SIR-2026 के तहत सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों की ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त को प्रकाशित की गई थी। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नागरिकों को 13 अगस्त से 12 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया था। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने भी मतदाताओं से ड्राफ्ट सूची में अपना विवरण जांचने और जरूरत होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराने की अपील की थी।
जाखड़ ने राजनीतिक दलों से पूछा सवाल
सुनील जाखड़ ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को लगता था कि मतदाता सूची में गलत नाम शामिल किए गए हैं या पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, तो इसके लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था उपलब्ध थी। उन्होंने सवाल किया कि मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाने वाले दलों ने इस प्रक्रिया का कितना इस्तेमाल किया।
जाखड़ के मुताबिक राजनीतिक दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अपने स्तर पर मतदाता सूची की जांच के बाद कितनी गड़बड़ियां संबंधित अधिकारियों के सामने रखीं और कितनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं।
उन्होंने उन आरोपों पर भी सवाल उठाया जिनमें मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया को लोकतंत्र से जोड़कर आलोचना की जा रही है। जाखड़ का कहना है कि जब पूरी प्रक्रिया के दौरान आपत्ति दर्ज कराने का अवसर उपलब्ध था, तब राजनीतिक दलों को बताना चाहिए कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्या कदम उठाए।
घर-घर जाकर हुआ था सत्यापन
पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान घर-घर सत्यापन अभियान चलाया गया था। इसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद नाम शामिल कराने, नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने और मतदाता विवरण में सुधार के लिए अलग-अलग निर्धारित फॉर्म उपलब्ध कराए गए थे।
निर्वाचन प्रक्रिया में फॉर्म-6 नए मतदाता के पंजीकरण, फॉर्म-6ए पात्र प्रवासी भारतीय मतदाताओं के लिए, फॉर्म-7 किसी नाम को हटाने संबंधी आपत्ति और फॉर्म-8 मतदाता विवरण में सुधार या पता बदलने जैसे मामलों के लिए निर्धारित किया गया। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी इन प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई थी।
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी किए जाने के दौरान पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी हुई थी। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई थी।
12 सितंबर तक था दावे-आपत्तियों का समय
पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 12 सितंबर थी। मतदाताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा दी गई थी। आवेदन वोटर पोर्टल और मोबाइल माध्यम के अलावा बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ कार्यालयों में भी जमा किए जा सकते थे।
जाखड़ का सवाल इसी प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि जिन राजनीतिक दलों को मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका थी, उन्हें उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए थीं। अब उन्हें सार्वजनिक रूप से यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने कितने मामलों में आपत्ति दर्ज कराई।
मतदाता सूची को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस जारी है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों के बाहर होने के बाद भी सवाल उठे थे। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट सूची में करीब 20.66 लाख पुराने पंजीकृत मतदाताओं के नाम नहीं थे; इनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, पता न चलने वाले और डुप्लीकेट के रूप में दर्ज मामले शामिल बताए गए। चूंकि यह ड्राफ्ट सूची थी, इसलिए निर्धारित अवधि में दावे और आपत्तियों का अवसर दिया गया।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच सुनील जाखड़ ने अब विरोधी दलों से औपचारिक रूप से दर्ज कराई गई आपत्तियों का विवरण सामने रखने को कहा है। उनका तर्क है कि मतदाता सूची पर सवाल उठाने के साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया का कितना उपयोग किया गया।
पंजाब में SIR-2026 की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।