मोहाली: पंजाब के शंभू रेलवे ट्रैक पर हुए आइईडी विस्फोट के बाद बरामद शव की पहचान के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब जगरूप सिंह उर्फ जूपा के परिजनों के डीएनए सैंपल लेने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य घटनास्थल से बरामद शव की आधिकारिक पहचान की पुष्टि करना है कि वह वास्तव में जगरूप सिंह का ही था।

एनआईए ने जगरूप सिंह की मां बलविंदर कौर और भाई सतनाम सिंह के डीएनए सैंपल लेने के लिए एनआईए की विशेष अदालत में आवेदन दायर किया है। उम्मीद है कि सितंबर के पहले सप्ताह में इस मामले की सुनवाई होगी। इसके बाद अदालत के आदेश के आधार पर डीएनए सैंपल लिए जा सकेंगे।

पुलिस के अनुसार 27 अप्रैल की रात करीब 8:23 से 8:30 बजे के बीच पंजाब के पटियाला जिले में राजपुरा और शंभू रेलवे स्टेशनों के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (मालगाड़ी ट्रैक) पर आइईडी ब्लास्ट हुआ था। हालांकि, विस्फोट के समय किसी ट्रेन को नुकसान नहीं पहुंचा था। विस्फोट के बाद पुलिस ने घटनास्थल से एक मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य बरामद किए थे। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने मृतक की पहचान जिला तरनतारन के पंजवार निवासी जगरूप सिंह के रूप में की थी। विस्फोट में उसका शव बुरी तरह क्षत-विक्षत होकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गया था।

जांच के दौरान जगरूप सिंह के मोबाइल फोन और उससे हुई कॉल के आधार पर पुलिस ने मामले में शामिल अन्य संदिग्धों तक पहुंच बनाई और कुछ आरोपितों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, शव की पहचान की आधिकारिक पुष्टि के लिए अब डीएनए जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।एनआईए अधिकारियों के अनुसार यदि डीएनए जांच में बरामद शव का मिलान जगरूप सिंह की मां और भाई के डीएनए से हो जाता है, तो यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाएगी कि मृतक जगरूप सिंह ही था। इसके बाद उसके खिलाफ चल रहे मामले को बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है।

यदि डीएनए मैच नहीं होता है, तो एनआईए के सामने जांच की नई दिशा खुल जाएगी और फिर यह पता लगाया जाएगा कि बरामद शव वास्तव में किसका था तथा जगरूप सिंह के साथ क्या हुआ। फिलहाल एनआईए की ओर से अदालत में आवेदन दायर किया जा चुका है और सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाली सुनवाई के बाद मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।

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