गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (GADVASU) जनवरी में एक मोबाइल टेस्टिंग लैब शुरू करने जा रही है। इसके जरिए पूरे पंजाब में दूध, पशु आहार, चारे और साइलेज के नमूनों की मुफ्त जांच की जा सकेगी। यह 'लैब-ऑन-व्हील्स' (चलती-फिरती प्रयोगशाला) राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाएगी, जिससे पशुपालकों को वैज्ञानिक जांच की सुविधा उनके करीब मिल सकेगी और ग्रामीण इलाकों में भी यह सेवा उपलब्ध हो पाएगी।
GADVASU के कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने बताया, "यह वैन यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) पर खड़ी रहेगी। जरूरत पड़ने पर यह गांवों में भी जाएगी।" यूनिवर्सिटी 1.55 करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) ग्रांट की मदद से यह मोबाइल लैब तैयार कर रही है। दूध की गुणवत्ता जांचने और मिलावट का पता लगाने के अलावा, यह लैब पशु आहार और चारे के नमूनों में मौजूद पोषक तत्वों और एफलाटॉक्सिन जैसे हानिकारक तत्वों की भी जांच करेगी, जो जानवरों की सेहत और दूध उत्पादन पर बुरा असर डाल सकते हैं।
डॉ. गिल ने बताया कि चारे की जांच की काफी मांग है। यह मोबाइल यूनिट डेयरी किसानों को यह समझने में मदद करेगी कि उनके पशुओं के खान-पान में क्या कमियां हैं। इससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित दूध पहुंचना सुनिश्चित होगा। दूध बेचने वाले और उपभोक्ता, दोनों ही अपने दूध के नमूनों की जांच करवा सकेंगे। ज्यादातर जांच मुफ्त होंगी, जबकि कुछ खास जांचों के लिए मामूली शुल्क देना होगा।
इस पहल का स्वागत करते हुए मोगा जिले के डेयरी किसान गुरप्रीत सिंह ने कहा कि डेयरी फार्मिंग में पशु आहार पर सबसे ज्यादा खर्च होता है, लेकिन कई किसानों को यह नहीं पता होता कि उनके चारे और साइलेज में असल में कितने पोषक तत्व हैं। उन्होंने कहा, "कई बार हम पशु आहार सप्लीमेंट्स पर बहुत पैसा खर्च कर देते हैं, जबकि हमें यह भी नहीं पता होता कि हमारा चारा जानवरों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर रहा है या नहीं। अगर हमारे गांवों के पास ही नमूनों की जांच हो सके, तो हम पशुओं के खान-पान को लेकर बेहतर फैसले ले पाएंगे और दूध का उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे।"
लुधियाना के एक अन्य डेयरी किसान, बलविंदर सिंह ने कहा कि घर के पास मिलने वाली इस सुविधा से किसानों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। उन्होंने कहा, "अभी पशु आहार या चारे की जांच कराने के लिए अक्सर लैब तक जाना पड़ता है और फिर नतीजों का इंतजार करना पड़ता है। यह मोबाइल यूनिट किसानों, खासकर छोटे डेयरी मालिकों तक वैज्ञानिक सलाह और मार्गदर्शन आसानी से पहुंचाएगी।" उपभोक्ताओं ने भी दूध की गुणवत्ता की जांच करने की इस योजना का स्वागत किया है। लुधियाना की रहने वालीं हरमनप्रीत कौर, जो एक गृहिणी हैं और पास के एक गाँव से दूध खरीदती हैं, ने बताया कि बच्चे और बुजुर्ग रोज़ाना दूध का सेवन करते हैं। उन्होंने कहा, "कोई भी ऐसी पहल जो मिलावट का पता लगाने और गुणवत्ता सुधारने में मदद करे, वह उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों के लिए अच्छी है।"
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