Jalandhar.जालंधर: होशियारपुर में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में आग लगाने की बजाय आधुनिक मशीनों के माध्यम से पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं। उपायुक्त (डीसी) होशियारपुर ने स्पष्ट कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
डीसी ने बताया कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है ताकि वे वैकल्पिक तरीकों को अपनाकर फसल अवशेषों का सही उपयोग कर सकें।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) जैसी आधुनिक कृषि मशीनों का उपयोग करें। इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में ही नष्ट या मिलाया जा सकता है, जिससे भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है और अगली फसल की पैदावार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
प्रशासन की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि किसानों को मशीनों पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे आसानी से इन तकनीकों को अपना सकें। कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
डीसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और इसमें किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसान पराली को जलाने की बजाय उसे पशु चारे, कम्पोस्ट खाद या अन्य उपयोगी संसाधनों में बदलें तो इससे अतिरिक्त आय का भी साधन बन सकता है।
अंत में डीसी ने सभी किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि सभी मिलकर प्रयास करें तो न केवल प्रदूषण को रोका जा सकता है, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ भी बनाया जा सकता है।