चंडीगढ़ : पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। महज दो दिनों के भीतर पार्टी से जुड़े तीन विधायकों ने अलग होने का फैसला किया और सोमवार, 2 नवंबर 2026 को तीनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। इनमें अमृतसर नॉर्थ के विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना के विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से पंजाब की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। खास बात यह है कि इस सूची में समाना और सनौर विधानसभा सीटों के उम्मीदवारों के नाम शामिल नहीं थे। इसके एक दिन बाद रविवार को इन दोनों क्षेत्रों के विधायकों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सोमवार को कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया।
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा स्पीकर को भेजा इस्तीफा
अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में 1 नवंबर 2026 से विधानसभा की सदस्यता छोड़ने की बात कही है। कुंवर विजय प्रताप सिंह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर आम आदमी पार्टी का दामन थामा था। चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद वह अमृतसर नॉर्थ से विधायक बने थे। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनके और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं। वह कई मौकों पर पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली और विभिन्न मामलों की जांच को लेकर सवाल उठा चुके थे। आम आदमी पार्टी ने जून 2025 में कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें पांच साल के लिए निलंबित भी कर दिया था।
बरगाड़ी बेअदबी मामले की जांच को लेकर उठाए थे सवाल
कुंवर विजय प्रताप सिंह 2015 के बरगाड़ी बेअदबी और उससे जुड़े कोटकपूरा एवं बहिबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की जांच से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने इन मामलों में न्याय मिलने में देरी और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार नाराजगी जताई थी। जनवरी 2023 में जांच से जुड़े मतभेदों के बाद उन्होंने विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में नशे, अपराध, जबरन वसूली और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए थे। जून 2025 में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर भी उन्होंने आपत्ति जताई थी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद और गहरे हुए। सोमवार को कुंवर विजय प्रताप सिंह के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही पंजाब में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने वाले नेताओं की संख्या बढ़कर तीन हो गई।
रविवार को चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने छोड़ी थी AAP
इससे पहले रविवार, 1 नवंबर को पटियाला जिले के दो विधायकों ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इनमें समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं। चेतन सिंह जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। उनके इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति में उनकी अगली राजनीतिक पारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। वहीं, सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के भी पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद सामने आते रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली, नशे की समस्या और अपने विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे। दोनों विधायकों के इस्तीफे के बाद सोमवार को बीजेपी में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी हुई। दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई थी।
2027 चुनाव से पहले AAP की पहली सूची के बाद बढ़ी नाराजगी
पंजाब में इन इस्तीफों का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने शनिवार को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। हालांकि, इस सूची में समाना और सनौर सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए थे। पार्टी ने इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त किए थे। सनौर में रंजोध हडाना और समाना में पूर्व अकाली मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई थी। इन नियुक्तियों के बाद दोनों मौजूदा विधायकों के दोबारा टिकट मिलने की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। इसी बीच दोनों विधायकों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा के इस्तीफों को पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति और आंतरिक असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के फैसलों के पीछे उनके अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय कारण भी रहे हैं।
बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में नई हलचल
सोमवार को दिल्ली में तीनों नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी की ओर से भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया सामने आई है। पंजाब AAP के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने बीजेपी पर दूसरी पार्टियों से निकाले गए या अलग हुए नेताओं को शामिल करने को लेकर निशाना साधा। दूसरी ओर बीजेपी ने तीनों नेताओं को अपने साथ जोड़कर पंजाब में राजनीतिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया है। दो दिनों में तीन विधायकों के अलग होने से भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार और आम आदमी पार्टी के सामने संगठनात्मक चुनौती जरूर बढ़ी है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले दिनों में पार्टी के अन्य नेता क्या रुख अपनाते हैं और बीजेपी इन नए नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में किस तरह जिम्मेदारी देती है। हालांकि, कुंवर विजय प्रताप सिंह का विधानसभा से इस्तीफा स्वीकार होना अभी विधानसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा के मामले में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने और विधानसभा सदस्यता समाप्त होने को अलग-अलग प्रक्रियाओं के रूप में देखना होगा। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
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