Ludhiana.लुधियाना: लुधियाना में शहर के लिए जल संसाधन और पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। बुद्ध नाला, जो शहर की जल निकासी और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, अलग-अलग प्रयासों के बावजूद धीरे-धीरे प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण खतरे में है।
स्थानीय प्रशासन ने कई बार नाला सफाई और संरक्षण के प्रयास किए हैं। इन प्रयासों में नियमित सफाई अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि यह नाला अब बचाव की स्थिति से बाहर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नाला पर लगातार बढ़ता प्रदूषण, औद्योगिक कचरा, घरों और दुकानों का अतिक्रमण तथा अवैध निर्माण नाले की स्वच्छता और जल प्रवाह पर गंभीर असर डाल रहे हैं। उन्होंने चेताया कि अगर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह नाला पूरी तरह से असमर्थ और गंदगी का अड्डा बन जाएगा।
नगरीय विकास अधिकारियों ने कहा, “हमने कई बार सफाई और अतिक्रमण हटाने के प्रयास किए हैं। लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और जनता की अनदेखी के कारण नाले की स्थिति पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय नागरिकों को भी जिम्मेदारी उठानी होगी और नाले में कचरा डालने से रोकना होगा।
स्थानीय निवासी और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कोशिशों की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि पर्याप्त जागरूकता और स्थायी समाधान के बिना यह प्रयास केवल अस्थायी लाभ ही दे पाएंगे। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि नाला संरक्षण के लिए लंबी अवधि की योजना बनाई जाए।
इस स्थिति के चलते पर्यावरणविद यह मानते हैं कि बुद्ध नाला अब केवल एक स्वच्छता अभियान से नहीं बच पाएगा। स्थायी समाधान के लिए औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, नाला किनारे हरित क्षेत्र का विकास और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।
नगर निगम और प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि नाले की सफाई और सुधार अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय संवेदनशील है और सिर्फ प्रयासों से नाला बचाना संभव नहीं है।