Jalandhar.जालंधर: शहर में बढ़ते नशे के मामलों को देखते हुए कपूरथला के SSP ने समाज के सभी वर्गों से मिलकर संतुलित और प्रभावी नशा विरोधी रणनीति बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस का काम नहीं है, बल्कि इसमें समाज, परिवार और स्थानीय संस्थानों का भी योगदान जरूरी है।
SSP ने स्थानीय मीडिया को बताया कि नशा रोकथाम के लिए सिर्फ सख्त कानून और छापेमारी पर्याप्त नहीं हैं। “हमें युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक समर्थन के माध्यम से नशे से दूर रखने की जरूरत है। साथ ही, पुलिस को भी अपराध नियंत्रण और समाज के सहयोग के बीच संतुलन बनाना होगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने नशा विरोधी कार्यक्रमों में युवाओं, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। SSP ने कहा कि जागरूकता अभियान, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और रिहैबिलिटेशन केंद्रों के माध्यम से नशे की आदतों को रोकना और सुधारना संभव है।
कपूरथला में पिछले कुछ महीनों में नशे से जुड़ी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। SSP ने बताया कि पुलिस ने इन मामलों पर नजर रखने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई है, लेकिन यह केवल प्रारंभिक कदम हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें और नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयास में सहयोग करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशा विरोधी रणनीति में सख्ती के साथ-साथ सामाजिक, मानसिक और शैक्षणिक उपायों को भी शामिल करना चाहिए। उन्होंने SSP की इस अपील की सराहना की और कहा कि समाज के सभी हिस्सों को एक साथ लाने से ही नशा रोकथाम में सफलता मिल सकती है।
SSP ने बताया कि भविष्य में जिले में नशा विरोधी कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ समाजसेवी, शिक्षक और परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे। यह पहल युवाओं को नशे की खतरनाक आदतों से बचाने और सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।