Jalandhar.जालंधर: जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। कपूरथला के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) ने कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने और इसके वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
डीसी ने अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि पराली जलाने से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और कृषि भूमि की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समस्या का समाधान सिर्फ प्रशासनिक कदमों से नहीं, बल्कि किसानों की भागीदारी और जागरूकता से ही संभव है।
डीसी ने कहा कि सभी ब्लॉक, तहसील और पंचायत स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी को और कड़ा किया जाएगा। इसके तहत अधिकारियों को क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करने, किसानों को वैकल्पिक उपायों के बारे में जागरूक करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसान पराली का उपयोग खाद, कंपोस्टिंग और बायोगैस उत्पादन जैसे उपयोगी तरीकों में कर सकें। डीसी ने कहा, “किसानों को वैकल्पिक उपायों के फायदे समझाने और उनकी मदद करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।”
बैठक में जिला कृषि विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने डीसी को क्षेत्र में चल रहे उपायों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएँ उपलब्ध हैं, जिनका किसानों को लाभ उठाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
डीसी ने किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने, जागरूकता अभियान चलाने और मीडिया के माध्यम से संदेश फैलाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए खतरा है। इसलिए सभी विभाग मिलकर इस समस्या का समाधान करें।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी डीसी के इस कदम का स्वागत किया। उनका कहना है कि प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और किसानों की जागरूकता से ही पराली जलाने की घटनाओं को रोका जा सकता है।
डीसी ने अंत में अधिकारियों से कहा कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ कृषि प्रथाओं में सुधार भी संभव हो सके।