Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि कार्यवाहक अधिकारियों की जगह सक्षम और योग्य अधिकारियों को नियुक्त करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है। राज्यपाल कुल्लू और चंबा ज़िलों के आपदा प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक राहत सामग्री ले जा रहे दो वाहनों को हरी झंडी दिखाने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश राज्य रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से भेजी गई इस राहत सामग्री का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम से पहले पुनर्वास प्रयासों में सहायता प्रदान करना है। राहत सामग्री में 74 रसोई सेट, 300 तिरपाल शीट, 280 कंबल, 20 आश्रय उपकरण किट और हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक अन्य घरेलू सामान शामिल हैं।
उन्होंने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPPCB) के सदस्य सचिव सहित कई प्रमुख प्रशासनिक पदों पर कार्यवाहक या अतिरिक्त प्रभार नियुक्तियों को जारी रखने के संबंध में सरकार से जवाब माँगा। शुक्ला ने कहा, "हमारे कार्यालय को एक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता से शीर्ष नौकरशाही और पुलिस अधिकारियों की अस्थायी नियुक्तियों के संबंध में एक पत्र मिला है। तदनुसार, मैंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जवाब माँगा है। अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।" मुख्य सचिव को संबोधित एक आधिकारिक पत्र में, राज्यपाल सचिवालय ने कहा कि 5 अक्टूबर, 2025 को उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी देव आशीष भट्टाचार्य से एक ज्ञापन प्राप्त हुआ है। राज्यपाल को लिखे पत्र में इन प्रमुख प्रशासनिक पदों पर "अनियमित नियुक्तियों" का आरोप लगाया गया है।
राज्यपाल के सचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में मुख्य सचिव को "इस मामले की जाँच करने और राज्यपाल के अवलोकनार्थ टिप्पणियाँ भेजने" का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधन, जिसमें कुलपतियों की नियुक्ति के लिए राज्यपाल की सहमति की आवश्यकता को हटा दिया गया है, पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, शुक्ला, जो राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं, ने कहा, "यह एक ऐसा सवाल है जो मीडिया को राज्य सरकार से पूछना चाहिए। हम पूरी तरह से कानून के दायरे में और राजभवन के अधिकार क्षेत्र में काम कर रहे हैं।"= उन्होंने आगे कहा कि भारत के राष्ट्रपति ने राज्य के विधेयकों की समय-सीमा तय करने पर स्पष्टता की मांग करते हुए अनुच्छेद 143 के तहत इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय को भेजा है, और कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, हम उसका पालन करेंगे।
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