शिक्षक भर्ती पर फंसा पेंच, 532 पदों के लिए अब हाईकोर्ट में चंडीगढ़ से मांगा जवाब
चंडीगढ़ में शिक्षक भर्ती पर संकट, हाईकोर्ट में प्रशासन बताएगा आगे की योजना
PUNJAB: चंडीगढ़ में 532 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भर्ती के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है, जहां प्रशासन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। बताया जा रहा है कि अभी तक भर्ती प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए रिक्रूटमेंट एजेंसी का चयन नहीं हो पाया है।
भर्ती प्रक्रिया में देरी पर उठे सवाल
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की योजना बनाई गई थी। 532 पदों पर भर्ती को लेकर उम्मीदवारों में उम्मीद जगी थी, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण अब सवाल उठने लगे हैं।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रशासन से पूछा जा सकता है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में देरी क्यों हुई और इसे पूरा करने के लिए क्या समयसीमा तय की गई है।
रिक्रूटमेंट एजेंसी का चयन नहीं हुआ
सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा और चयन प्रक्रिया संचालित करने वाली एजेंसी का अब तक चयन नहीं किया गया है। एजेंसी का चयन नहीं होने के कारण भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
प्रशासन को अदालत के सामने यह बताना होगा कि एजेंसी चयन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और भर्ती को निर्धारित समय में कैसे पूरा किया जाएगा।
उम्मीदवारों की बढ़ी चिंता
लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में देरी को लेकर नाराजगी है। उम्मीदवारों का कहना है कि पद खाली होने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिसका असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
अभ्यर्थी चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और नियुक्तियां समय पर पूरी की जाएं।
हाईकोर्ट की सुनवाई पर नजर
29 जुलाई को होने वाली सुनवाई में प्रशासन की ओर से भर्ती की वर्तमान स्थिति, एजेंसी चयन और आगे की कार्ययोजना को लेकर जवाब दाखिल किया जा सकता है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन अदालत को क्या जानकारी देता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर क्या रोडमैप पेश करता है।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा फायदा
यदि 532 शिक्षकों की भर्ती पूरी होती है तो चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी और स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था मजबूत होगी।