पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (DA/DR) के भुगतान के संबंध में न्यायिक निर्देशों का पालन करने में पंजाब सरकार के "अड़ियल रवैये" पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई की तारीख, 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को 30 अक्टूबर तक एक व्यक्तिगत हलफनामा (affidavit) दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है, साथ ही उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना (costs) भी लगाया गया है।
न्यायमूर्ति हर्ष बंगर ने यह निर्देश एक अवमानना ​​याचिका (contempt petition) पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट के उस आदेश का जानबूझकर और सोच-समझकर उल्लंघन किया गया है, जिसमें पंजाब में कार्यरत 'ऑल इंडिया सर्विसेज' (All India Services) के अधिकारियों पर लागू दरों के अनुसार सभी बकाया किस्तों का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति बंगर ने कहा, "तथ्य और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि प्रतिवादियों ने इस अदालत के निर्देशों का पालन करने के मामले में अड़ियल रवैया अपनाया है, जिसे कानून के तहत बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।"
मामले की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील संजय कौशल ने बताया कि एक डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के कई मौके दिए थे। हालांकि, ऐसा लगता है कि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न्यायमूर्ति बंगर ने कहा, "यह भी बताया गया है कि पंजाब सरकार के मुख्य सचिव के खिलाफ एक झूठा हलफनामा दाखिल करने के संबंध में आपराधिक अवमानना ​​(criminal contempt) की कार्यवाही शुरू की गई है, और यह मामला अभी इस अदालत की डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है।"
याचिकाकर्ता की ओर से वकील सनी सिंगला, रीति अग्रवाल और अर्जुन कौशल भी पेश हुए।
मामले के तथ्यों का जिक्र करते हुए, बेंच ने बताया कि इस अवमानना ​​याचिका पर पिछली सुनवाई 21 अगस्त को हुई थी। उस समय राज्य सरकार के वकील के अनुरोध पर उन्हें स्टेटस रिपोर्ट या अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दाखिल करने के लिए समय दिया गया था। हालांकि, पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद ऐसी कोई रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। राज्य सरकार के वकील ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए और समय मांगा, जिसे अदालत ने "पूरी तरह से अनुचित" करार दिया। बेंच ने कहा, "आगे बढ़ने से पहले, पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से तीन दिनों के भीतर अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि 8 अप्रैल के रिट कोर्ट के आदेश और 3 अगस्त के डिवीजन बेंच के आदेश का पालन कैसे किया गया है। साथ ही, उन्हें 17 अगस्त के उस मेमोरेंडम के बारे में भी स्पष्टीकरण देना होगा जिसमें पंजाब सरकार ने यह निर्देश जारी किया था कि 'वित्त विभाग (FD) की पूर्व सहमति के बिना या सामान्य निर्देश जारी होने से पहले, ऐसे किसी भी आदेश को लागू नहीं किया जाएगा' (जो भी पहले हो)।"
आदेश समाप्त करने से पहले, जस्टिस बुंगर ने निर्देश दिया कि हलफनामा दाखिल करने के साथ-साथ 1 लाख रुपये का खर्च (कॉस्ट) भी जमा करना होगा, जिसे हाई कोर्ट लॉयर्स वेलफेयर फंड में डाला जाएगा।
3 अगस्त के फैसले में क्या कहा गया था
यह विवाद 8 अप्रैल के एक साझा फैसले से जुड़ा है। इस फैसले में पंजाब सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) उसी दर से दे, जिस दर से पंजाब में तैनात 'ऑल इंडिया सर्विसेज' के सदस्यों को दिया जाता है (केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार)। फैसले में राज्य सरकार को 30 जून तक इसका पालन करने का निर्देश दिया गया था और मुख्य सचिव से कहा गया था कि वे पालन की पुष्टि करते हुए एक हलफनामा दाखिल करें। बाद में इस मामले में अपीलें दायर की गईं।
3 अगस्त का फैसला जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने सुनाया था। बेंच ने राज्य सरकार और PSPCL द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया और सिंगल जज के निर्देशों को बरकरार रखा। हालांकि, बेंच ने इसे लागू करने की समय-सीमा में बदलाव किया, क्योंकि अपीलों के लंबित रहने के दौरान 30 जून की मूल समय-सीमा निकल चुकी थी। बेंच ने निर्देश दिया कि DA/DR की लंबित किस्तों का भुगतान दो सप्ताह के भीतर कर दिया जाए।
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