चंडीगढ़। पंजाब के साथ-साथ अब हरियाणा और चंडीगढ़ में भी नशे की समस्या एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से चंडीगढ़ में “Gen Z Against Drugs” नाम से एक बड़ा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

यह कार्यक्रम 20 सितंबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में आयोजित होगा। इसमें शहर के विभिन्न कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

युवाओं को नशे के खिलाफ जोड़ने की पहल

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना और उन्हें नशे के खिलाफ एकजुट करना है।

आयोजकों का कहना है कि आज नशा केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।

युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए जरूरी है कि उन्हें जागरूक किया जाए और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए।

हजारों युवाओं के पहुंचने की उम्मीद

कार्यक्रम में चंडीगढ़ के विभिन्न कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के छात्रों के अलावा शहर के अन्य युवा भी हिस्सा लेंगे।

आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में हजारों युवाओं के पहुंचने की संभावना है। इसका उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है, जहां युवा नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर सकें।

कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया जाएगा कि वे अपने भविष्य और स्वास्थ्य के लिए नशे से दूरी बनाए रखें।

नशा समाज के लिए बड़ी चुनौती

कार्यक्रम के संयोजक संजीव राणा ने कहा कि नशा आज केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं है, बल्कि यह देश की युवा शक्ति और भविष्य के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है।

उन्होंने कहा कि नशे के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं और युवाओं का जीवन गलत दिशा में जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा।

जागरूकता से ही संभव है बदलाव

संजीव राणा ने कहा कि केवल कानून बनाकर नशे की समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को सही दिशा देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशे से दूर रखा जा सकता है।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बढ़ी चिंता

पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या को लेकर चर्चा में रहा है। अब हरियाणा और चंडीगढ़ में भी नशे के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक भागीदारी बेहद जरूरी है। परिवार, शिक्षण संस्थान और प्रशासन मिलकर ही प्रभावी बदलाव ला सकते हैं।

युवाओं की भूमिका अहम

आयोजकों का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि युवा खुद जागरूक होंगे और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगे तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

“Gen Z Against Drugs” कार्यक्रम इसी सोच के साथ आयोजित किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी नशे के खिलाफ एक मजबूत संदेश दे सके।

कार्यक्रम में होंगे जागरूकता अभियान

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को नशे के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा नशे से दूर रहने, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का संदेश भी दिया जाएगा।

समाज को जोड़ने की कोशिश

आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक अभियान की शुरुआत है।

इसका उद्देश्य युवाओं के बीच ऐसी सोच विकसित करना है, जिसमें वे नशे को जीवन का हिस्सा नहीं बल्कि एक गंभीर समस्या समझें।

भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश

“Gen Z Against Drugs” के जरिए युवाओं को यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि देश का भविष्य उनके हाथों में है और उन्हें अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगानी चाहिए।

चंडीगढ़ में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम नशे के खिलाफ जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में युवा जुड़ेंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश जाएगा।

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