Punjab-Haryana में वन क्षेत्र बढ़ा, फिर भी कमी बरकरार

Update: 2026-04-06 07:03 GMT
Punjab.पंजाब: पंजाब और हरियाणा में वन क्षेत्र को लेकर हालिया रिपोर्ट में मामूली सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। Forest Survey of India द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों राज्यों में हरित क्षेत्र में कुछ वृद्धि हुई है, हालांकि यह वृद्धि अपेक्षित स्तर से काफी कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए गए वृक्षारोपण अभियानों का असर दिखाई देने लगा है। कई जिलों में नए पौधे लगाए गए हैं और शहरी क्षेत्रों में भी हरियाली बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद, तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और कृषि विस्तार के कारण वन क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में वन क्षेत्र का प्रतिशत पहले से ही कम रहा है। ऐसे में मामूली बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के दौर में हरित क्षेत्र का विस्तार बेहद जरूरी हो गया है।
पंजाब में खासतौर पर खेती के लिए भूमि का अधिक उपयोग होने के कारण जंगलों का दायरा सीमित है। वहीं हरियाणा में भी तेजी से बढ़ते शहर और औद्योगिक क्षेत्र वन भूमि को प्रभावित कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में सरकारों के लिए संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने, खाली पड़ी जमीन का उपयोग करने और लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, स्कूलों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। कई बार वृक्षारोपण अभियान के बाद पौधों की उचित देखरेख नहीं हो पाती, जिससे उनका विकास रुक जाता है। ऐसे में दीर्घकालिक योजना और निगरानी बेहद आवश्यक है।
आम लोगों की भागीदारी को भी इस दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी ले, तो वन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
कुल मिलाकर, पंजाब और हरियाणा में वन क्षेत्र में हुई यह मामूली बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। पर्यावरण संतुलन और बेहतर भविष्य के लिए हरित क्षेत्र का विस्तार अत्यंत आवश्यक है, जिसके लिए सरकार, समाज और आम नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
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