अमृतसर। भारतीय जनता पार्टी की नशा मुक्त पंजाब यात्रा के दौरान अमृतसर में पार्टी के भीतर गुटबाजी के आरोप सामने आए हैं। यात्रा का निर्धारित रूट बदले जाने और इसके बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच रास्ते में रथ से उतरने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा का रास्ता बदले जाने के बाद यात्रा में शामिल ट्रक और भाजपा नेता अक्षय शर्मा के समर्थकों का काफिला आमने-सामने आ गया। इसके बाद जिला प्रधान सलिल कपूर, पूर्व सांसद श्वेत मलिक और सुखमिंदर पिंटू समेत कुछ नेता ट्रक से नीचे उतर गए।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से अलग-अलग बातें सामने आई हैं। अमृतसर भाजपा के जिला प्रधान सलिल कपूर ने यात्रा बीच में छोड़कर जाने की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि यात्रा को आगे मजीठा क्षेत्र के नेताओं को सौंपा जाना था और इसी प्रक्रिया के तहत वे रथ से नीचे उतरे थे।
नशा मुक्त पंजाब यात्रा को लेकर भाजपा की ओर से अमृतसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यात्रा के लिए पहले से एक मार्ग निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में रूट में बदलाव किया गया। इसी बदलाव के बाद कथित तौर पर असमंजस की स्थिति पैदा हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बदले हुए रास्ते पर यात्रा का ट्रक आगे बढ़ा तो भाजपा नेता अक्षय शर्मा के समर्थकों का काफिला सामने आ गया।
दोनों काफिलों के आमने-सामने आने के बाद वहां कुछ समय के लिए स्थिति असहज हो गई। इसी दौरान यात्रा के रथ पर सवार कुछ वरिष्ठ भाजपा नेता नीचे उतर गए। इनमें जिला प्रधान सलिल कपूर, पूर्व सांसद श्वेत मलिक और सुखमिंदर पिंटू का नाम सामने आया है। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी के भीतर आपसी मतभेद के कारण नेताओं ने यात्रा बीच में छोड़ दी।
इस घटनाक्रम को पार्टी की स्थानीय इकाई में कथित गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से इसे लेकर कोई एक समान आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अलग-अलग नेताओं की ओर से घटनाक्रम की अलग व्याख्या की जा रही है।
जिला प्रधान सलिल कपूर ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने यात्रा बीच में नहीं छोड़ी थी। उनके मुताबिक, यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम के तहत इसे आगे मजीठा क्षेत्र के भाजपा नेताओं को सौंपा जाना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण कुछ नेता रथ से नीचे उतरे और इसे किसी तरह की नाराजगी या गुटबाजी से जोड़ना सही नहीं है।
वहीं, यात्रा का रूट अचानक क्यों बदला गया और बदले हुए रास्ते पर अक्षय शर्मा के समर्थकों का काफिला किस परिस्थिति में सामने आया, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, रूट परिवर्तन के बाद ही दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे। इसी घटनाक्रम के बाद वरिष्ठ नेताओं के रथ से उतरने की बात सामने आई।
भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा राज्य में नशे के मुद्दे को लेकर निकाली जा रही है। पार्टी इसके माध्यम से नशे के खिलाफ अभियान को जनता तक पहुंचाने और इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा लंबे समय से प्रमुख विषयों में शामिल रहा है और विभिन्न राजनीतिक दल इसे लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।
ऐसे में भाजपा की इस यात्रा के दौरान सामने आया घटनाक्रम राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के रथ से उतरने के बाद इसे आंतरिक मतभेद से जोड़कर देखा गया, जबकि जिला नेतृत्व ने ऐसी किसी बात से इनकार किया है।
अमृतसर में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता इस यात्रा में शामिल हुए थे। पूर्व सांसद श्वेत मलिक समेत स्थानीय नेतृत्व की मौजूदगी के कारण यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन रास्ता बदले जाने के बाद पैदा हुई स्थिति ने यात्रा के राजनीतिक संदेश से अधिक पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया।
सलिल कपूर के मुताबिक यात्रा का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र के नेतृत्व को हस्तांतरण कार्यक्रम का हिस्सा था। उनका कहना है कि मजीठा क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद वहां के नेताओं को यात्रा की जिम्मेदारी दी जानी थी। इसी कारण उनका और अन्य नेताओं का रथ से उतरना पहले से तय प्रक्रिया का हिस्सा था।
दूसरी ओर, प्रत्यक्षदर्शियों के दावे के मुताबिक अक्षय शर्मा के समर्थकों के काफिले और यात्रा के ट्रक के आमने-सामने आने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। इसी वजह से पूरे मामले को स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच कथित मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल इस घटनाक्रम में किसी बड़े टकराव की जानकारी सामने नहीं आई है। यात्रा आगे अपने कार्यक्रम के अनुसार जारी रही। हालांकि रूट परिवर्तन और वरिष्ठ नेताओं के रथ से उतरने के कारण पार्टी के भीतर कथित गुटबाजी को लेकर चर्चा जरूर तेज हो गई है।
भाजपा नेतृत्व की ओर से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अभी जिला प्रधान सलिल कपूर ने गुटबाजी और यात्रा छोड़ने के दावों से इनकार करते हुए इसे जिम्मेदारी हस्तांतरण की सामान्य प्रक्रिया बताया है। दूसरी ओर प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के कारण मामला राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है।