Punjab पीढ़ियों से, मशहूर 'अमृतसरी कुलचा' अपनी कुरकुरी परत और मक्खन भरी स्टफिंग के लिए जाना जाता रहा है। अब, इसकी पहचान और विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक संगठन सामने आया है। 18 सदस्यों वाला 'अमृतसरी स्टफ्ड कुलचा वेंडर्स एसोसिएशन' शहर के कुलचा बनाने वालों और बेचने वालों को एक साथ लाता है।
तंदूर से एकदम गरमागरम निकलकर अमृतसर से दूर-दूर तक की मेज़ों तक पहुँचने वाला यह खास व्यंजन, अब पंजाब खाद्य प्रसंस्करण विभाग की एक पहल के केंद्र में है, जिसका मकसद इसे 'भौगोलिक संकेतक' (GI) टैग दिलाना है। इस कवायद का उद्देश्य उत्पाद की खास विशेषताओं, इसे बनाने के पारंपरिक तरीके और इसके भौगोलिक मूल के बीच एक संबंध स्थापित करना है। चौथी पीढ़ी के कुलचा-निर्माता और सर्टिफाइड शेफ, अमन खालसा इस एसोसिएशन के प्रमुख हैं और 'अमृतसरी स्टफ्ड कुलचा' के लिए GI टैग हासिल करने के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
खालसा ने बताया, "जब इस एसोसिएशन की घोषणा हुई, तो लोगों ने इसे काफी हैरानी और यहाँ तक कि मज़ाक के तौर पर भी लिया। कई लोगों ने तो यह भी सवाल उठाया कि क्या वायरल हुई तस्वीर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाई गई थी। लेकिन इस एसोसिएशन का एजेंडा सिर्फ GI टैग पाने तक सीमित नहीं है। यह शेफ के लिए पहचान पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, यूनिफॉर्म, स्वच्छता के मानक और काम करने के तय तरीके (SOPs) लागू करने का प्रस्ताव रखता है। इसके साथ ही, एक क्लाउड-आधारित वेबसाइट भी होगी, जिसमें असली अमृतसरी कुलचा बनाने वाले शेफ और विक्रेताओं का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "इसका मकसद यह तय करना है कि असली अमृतसरी कुलचा कौन बनाता है, इसे कैसे तैयार किया जाता है और इस उत्पाद को परिभाषित करने वाले मानक क्या होने चाहिए।"
Tags: