पंजाब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने आज मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पंजाब के सस्पेंड किए गए DIG हरचरण सिंह भुल्लर को गिरफ़्तार किया। ED ने यह मामला 6 नवंबर, 2025 को दर्ज किया था। इससे पहले, CBI ने 16 अक्टूबर, 2025 को BNS, 2023 की धारा 61(2) और PC एक्ट, 1988 की धारा 7 और 7A के तहत भ्रष्टाचार के एक मामले में भुल्लर को गिरफ़्तार किया था। CBI ने आकाश बट्टा की शिकायत पर FIR दर्ज की थी। बट्टा का आरोप था कि पंजाब पुलिस में रोपड़ रेंज के DIG के पद पर तैनात भुल्लर ने एक प्राइवेट बिचौलिये, कृशानू शारदा के ज़रिए गैर-कानूनी रिश्वत की मांग की थी। यह रिश्वत सरहिंद पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में फ़ायदा पहुंचाने और शिकायतकर्ता के बिज़नेस के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न होने देने के बदले मांगी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद एक ट्रैप लगाया गया और भुल्लर के कथित सहयोगी कृशानू शारदा को 16 अक्टूबर, 2025 को शिकायतकर्ता से मांगी गई रिश्वत के तौर पर 5,00,000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया। उसी दिन भुल्लर को भी गिरफ़्तार कर लिया गया। 14 दिन की रिमांड मांगते हुए, ED के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने चंडीगढ़ की CBI कोर्ट को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल पूरे मनी ट्रेल और बड़े नेक्सस का पता लगाने के लिए कस्टडी में पूछताछ ज़रूरी है।
ED ने कहा कि PMLA जांच के दौरान इकट्ठा किए गए फ़ाइनेंशियल रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर उनसे पूछताछ करना भी ज़रूरी था। हालांकि, आरोपी HS भुल्लर की ओर से पेश वकीलों SPS भुल्लर और करनजीत सिंह ने रिमांड अर्ज़ी का विरोध किया। वकील SPS भुल्लर ने तर्क दिया कि ED की ओर से रिमांड के लिए दायर अर्ज़ी बेबुनियाद थी और इसे ऐसे समय में दायर किया गया था जब शिकायतकर्ता से क्रॉस-एग्जामिनेशन चल रहा था। उन्होंने कहा कि यह आरोपी के निष्पक्ष और स्वतंत्र ट्रायल के संवैधानिक अधिकारों को कम करने की कोशिश थी। भुल्लर ने यह भी तर्क दिया कि जब से मामला दर्ज हुआ है, ED ने आरोपी के परिवार के सदस्यों को कई बार पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्होंने आगे दलील दी कि सभी दस्तावेज़ पहले से ही जांच एजेंसियों के पास मौजूद थे, इसलिए आरोपी को रिमांड पर लेने या गिरफ़्तार करने की कोई ज़रूरत नहीं थी। PMLA कोर्ट ने पूछताछ के लिए आरोपी को आठ दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है।
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