Punjab.पंजाब: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को ईडी (Enforcement Directorate) ने 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी (GST Fraud) मामले में 7 दिन की हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और अवैध धन के संचलन की जांच के तहत की गई है। ED अधिकारियों ने बताया कि हिरासत का उद्देश्य मंत्री और उनके सहयोगियों से इस मामले की गहन जांच करना है।
ED के सूत्रों ने बताया कि संजीव अरोड़ा और उनके सहयोगियों ने कथित रूप से फर्जी कंपनियों के माध्यम से GST की धोखाधड़ी की है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कर चोरी और फर्जी इनवॉइस का व्यापक जाल तैयार किया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। ED ने आरोप लगाया कि अरोड़ा के नेतृत्व और सहयोग से यह धोखाधड़ी की गई और इस मामले में कई संपत्तियों को भी अटैच किया गया है।
इससे पहले ED ने अरोड़ा के घर और कार्यालय पर छापेमारी की थी। अधिकारियों ने कहा कि छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जो GST धोखाधड़ी के सबूत प्रदान कर सकते हैं। मंत्री अरोड़ा के करीबी सूत्रों ने कहा कि अरोड़ा ईमानदारी से अपने पक्ष को पेश करेंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई ने हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर AAP सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में नेताओं को शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, AAP नेताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया है और कहा कि ED की कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि 100 करोड़ रुपये का GST धोखाधड़ी मामला पंजाब के लिए बड़ा वित्तीय और राजनीतिक संकेत है। ED की हिरासत से मंत्री पर दबाव बढ़ सकता है और आगे की जांच में नए खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की कार्रवाई वित्तीय अनुशासन और कर चोरी रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
मीडिया और जनता में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि अगर मंत्री सच में दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले का चुनावी असर भी हो सकता है क्योंकि पंजाब में आगामी चुनावों की तैयारी चल रही है।
ED ने स्पष्ट किया कि हिरासत अवधि के दौरान संजीव अरोड़ा से सभी आवश्यक पूछताछ की जाएगी और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि अगर नई जानकारी मिलती है, तो हिरासत बढ़ाई जा सकती है और अन्य आरोपी भी इस मामले में जांच के दायरे में आ सकते हैं।