Punjab.पंजाब: सिख धर्म के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी की जयंती पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देश-विदेश से आए सिख श्रद्धालु इस अवसर पर गुरुद्वारे में अपने श्रद्धा भाव प्रकट करने पहुंचे। सुबह से ही भजन, कीर्तन और अरदास की ध्वनि पूरे परिसर में गूंजती रही, जिससे भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
स्वर्ण मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने मंदिर परिसर में आने-जाने वाले मार्गों पर व्यवस्था की। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष मार्ग बनाए और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन सुनिश्चित किया। इसके साथ ही चिकित्सा और आपातकालीन सुविधाओं को भी मुहैया कराया गया।
भक्तों ने गुरु अर्जन देव जी की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए सेवा और मानवता का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मंदिर में लंगर की व्यवस्था भी विशेष रूप से की गई थी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन प्रदान किया गया। लंगर में सफाई और स्वास्थ्य मानकों का विशेष ध्यान रखा गया।
इस वर्ष की जयंती पर विशेष आकर्षण रहा गुरु अर्जन देव जी की भव्य प्रतिमा और गुरुद्वारे के सजावट। मंदिर परिसर में रंग-बिरंगे फूलों और रोशनी से इसे सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में माथा टेक कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की और गुरु जी के जीवन और शिक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
गुरु अर्जन देव जी का जीवन सेवा, त्याग और मानवता का प्रतीक माना जाता है। उनके द्वारा स्थापित ‘सिख ग्रंथ साहिब’ और गुरुद्वारे की परंपराएं आज भी अनुयायियों को मार्गदर्शन देती हैं। इस जयंती के अवसर पर भजन, कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से उनके आदर्शों को जीवंत रखने का प्रयास किया गया।
विदेशों से आए सिख धर्मावलंबियों ने भी इस अवसर पर भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि स्वर्ण मंदिर में गुरु अर्जन देव जी की जयंती मनाना उनके लिए अत्यंत पुण्यकारी और आध्यात्मिक अनुभव है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमिटी ने उनकी सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने भी भाग लिया, जिन्होंने गुरु जी के जीवन और उनके योगदान पर आधारित नाटक और प्रस्तुति दी। इससे युवा पीढ़ी में गुरु अर्जन देव जी के संदेश को समझने और अपनाने की भावना बढ़ी।
सभी भक्तों ने एकजुट होकर गुरु अर्जन देव जी के शिक्षा और संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस भव्य अवसर ने न केवल धार्मिक वातावरण को समृद्ध किया, बल्कि समाज में सेवा, भाईचारा और मानवता के मूल्यों को भी उजागर किया।
स्वर्ण मंदिर में गुरु अर्जन देव जी की जयंती पर उमड़ी श्रद्धा ने यह संदेश दिया कि आज भी उनके आदर्श और शिक्षाएं समाज में मार्गदर्शन का काम कर रही हैं। भक्तों की भीड़ और उनकी निष्ठा ने इस धार्मिक उत्सव को अत्यंत भव्य और यादगार बना दिया।