चंडीगढ़ : पंजाब के मोहाली में एक मां के साहसिक फैसले ने बेटी की मौत के दुख को कई परिवारों के लिए उम्मीद में बदल दिया। सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 18 वर्षीय सुरिंदर कौर के अंगदान से चार लोगों को नई जिंदगी मिली है। बेटी को खोने के गम के बीच मां ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का फैसला लिया।

हादसे के बाद सुरिंदर कौर को बचाने के लिए डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। इसके बाद परिवार के सामने सबसे कठिन फैसला लेने की घड़ी आई। बेटी की यादों को हमेशा जिंदा रखने के लिए मां ने उसके अंगों को दान करने की सहमति दी।
बेटी ने जाते-जाते बचाई कई जिंदगियां
अंगदान के जरिए सुरिंदर कौर के शरीर के जरूरी अंग जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए गए। इन अंगों से चार लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार के इस फैसले ने साबित कर दिया कि इंसानियत और दूसरों की मदद का जज्बा दुख की सबसे बड़ी घड़ी में भी कायम रह सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, अंगदान उन मरीजों के लिए वरदान साबित होता है जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं और जिन्हें प्रत्यारोपण की जरूरत होती है।
मां का फैसला बना प्रेरणा
बेटी को खोना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय दर्द होता है, लेकिन सुरिंदर की मां ने अपने दुख से ऊपर उठकर ऐसा निर्णय लिया, जिससे कई परिवारों में खुशियां लौट सकेंगी। अंगदान के इस फैसले ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में रोशनी ला सकता है।
अंगदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता
देश में अब अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। कई परिवार ऐसे कठिन समय में आगे आकर अपने प्रियजनों के अंग दान कर रहे हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों को जीवन मिल सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान के प्रति लोगों की सोच बदलने से हजारों मरीजों को नई उम्मीद मिल सकती है। सुरिंदर कौर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से जीवित रहने वाले लोगों के जरिए उनकी याद हमेशा बनी रहेगी। उनकी मां का यह फैसला आने वाले समय में कई लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा।

Tags: