NIT जालंधर में अगले पीढ़ी की ऊर्जा सामग्री पर सम्मेलन आयोजित

Update: 2026-04-05 13:03 GMT
Jalandhar.जालंधर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जालंधर ने ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए “Next-Gen Materials for Energy” नामक सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में नए और टिकाऊ सामग्री विकल्पों का विकास और उनके अनुप्रयोगों पर चर्चा करना था। इसमें सोलर सेल्स, बैटरी टेक्नोलॉजी, सुपरकंडक्टर्स और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में उपयोग की जाने वाली आधुनिक सामग्री पर विशेष जोर दिया गया।
NIT जालंधर के डायरेक्टर ने उद्घाटन सत्र में कहा कि “ऊर्जा की बढ़ती मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए नेक्स्ट-जेन सामग्री का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सम्मेलन विशेषज्ञों और छात्रों को नवीनतम अनुसंधान और तकनीकी प्रगति से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।”
सम्मेलन में उद्योग विशेषज्ञों ने ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान के नए दृष्टिकोण, नवाचार और प्रोटोटाइप विकास के उदाहरण साझा किए। कई सत्रों में सौर ऊर्जा के लिए हल्की, टिकाऊ और कुशल सामग्री, उच्च क्षमता वाली बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ऊर्जा की बचत तकनीकों पर चर्चा की गई।
शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नई सामग्री ऊर्जा उत्पादन और भंडारण को अधिक प्रभावी और पर्यावरण-स्नेही बना सकती हैं। साथ ही, उन्होंने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया कि वे ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को अपने करियर का हिस्सा बनाएं।
सम्मेलन में छात्रों के लिए भी अलग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उन्हें ऊर्जा सामग्री के प्रयोग और प्रोटोटाइप निर्माण में हाथ आजमाने का मौका मिला। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ अनुसंधान की दिशा में गहरी समझ विकसित करने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सम्मेलन न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं, बल्कि उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को ऊर्जा और सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने के लिए ऐसे आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए।
कुल मिलाकर, एनआईटी जालंधर द्वारा आयोजित यह सम्मेलन ऊर्जा और सामग्री विज्ञान में नवाचार को बढ़ावा देने, विशेषज्ञों और छात्रों को जोड़ने और अनुसंधान को व्यावहारिक दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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