Jalandhar.जालंधर: पंजाब के वरिष्ठ AAP नेता और पूर्व मंत्री सतिंदर सिंह चब्बेवाल ने आज AAP नेताओं के कार्यालयों और आवासों पर आयुक्त विभाग (ED) की छापेमारी की निंदा की। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करार दिया और कहा कि इसका उद्देश्य केवल AAP नेताओं को बदनाम करना है।
चब्बेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ED की इस कार्रवाई में किसी ठोस साक्ष्य या न्यायसंगत कारण का अभाव है। उनका कहना था कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक विरोधियों और सत्ता पक्ष द्वारा कानून के नाम पर दबाव बनाने का चलन बढ़ा है, और यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि AAP सदा से भ्रष्टाचार विरोधी रही है, और उनके नेताओं पर कार्रवाई केवल राजनीतिक प्रतिशोध और भय पैदा करने के उद्देश्य से की गई है। चब्बेवाल ने कहा, “इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र और कानून की भावना के खिलाफ है। जनता को भड़काने और नेताओं को डराने के लिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।”
AAP के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में सख्त प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ED की छापेमारी भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक जांच नहीं बल्कि राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल सत्ता के दुरुपयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इससे पहले आज सुबह ED की टीम ने पंजाब में AAP नेताओं के कार्यालयों और घरों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम वित्तीय और धन शोधन से संबंधित जांच के तहत उठाया गया है। हालांकि, छापेमारी के बाद AAP नेताओं ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
सतिंदर सिंह चब्बेवाल ने कहा कि AAP पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और कानून का सम्मान करती है, लेकिन कानून का दुरुपयोग किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने मीडिया और जनता से अपील की कि वे इस मामले को सावधानी और निष्पक्ष दृष्टिकोण से देखें।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सत्ता संघर्ष को दर्शाती है। उन्होंने चेताया कि कानून के उपयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
AAP नेताओं ने भी आश्वस्त किया कि वे कानूनी रूप से अपने अधिकारों और संसाधनों का इस्तेमाल कर ED कार्रवाई के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि कानून की ताकत से डराने का प्रयास असफल रहेगा, और पार्टी अपने राजनीतिक मिशन और कार्यों को जारी रखेगी।
इस घटना ने पंजाब में राजनीतिक तापमान और चर्चा को और बढ़ा दिया है, और राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले समय में इस मामले में राजनीतिक और कानूनी मोड़ देखने को मिल सकते हैं।