राजोआना की सजा कम करने की याचिका का केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध
सुप्रीम कोर्ट में बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उन्होंने 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी। राजोआना 29 साल से अधिक समय से जेल में हैं, जिसमें 15 साल से ज्यादा का समय उन्होंने मौत की सजा (डेथ रो) के कैदी के तौर पर बिताया है। उन्होंने अपनी दया याचिका पर फैसला लेने में हुई देरी का हवाला देते हुए मौत की सजा को बदलने की मांग की है।
केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच से कहा, "हम इस मामले में अपनी दलीलें रखेंगे। मुझे नहीं लगता कि ऐसी मांग स्वीकार की जा सकती है।" राजोआना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 30 साल से हिरासत में है और उसकी दया याचिका अभी भी लंबित है। बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है।
इससे पहले रोहतगी ने दलील दी थी कि मार्च 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से राजोआना के लिए दायर की गई दया याचिका अभी भी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से राजोआना की दया याचिका पर फैसला लेने को कहा था। मामले की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए, केंद्र ने कहा था कि दया याचिका पर विचार किया जा रहा है। सितंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए एक विस्फोट में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। जुलाई 2007 में एक विशेष अदालत ने राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।