Punjab पंजाब में गाद हटाने (डीसिल्टिंग) वाली जगहों पर लगी रोक को 20 जनवरी तक बढ़ा दिया है। NGT ने पंजाब से जुड़े पर्यावरण के पांच मामलों में अपने पहले के अंतरिम आदेशों को लागू रखा है। NGT के इस नए आदेश से राज्य में गाद हटाने के काम पर कम से कम 20 जनवरी, 2027 तक रोक जारी रहेगी, जब इन मामलों की अगली सुनवाई होगी। NGT की मुख्य बेंच, जिसके प्रमुख चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफ़रोज़ अहमद हैं, ने 7 अक्टूबर को यह आदेश दिया। उन्होंने पंजाब सरकार के वकील की मेडिकल आधार पर सुनवाई टालने की अपील को मंज़ूरी दी थी।
बेंच ने निर्देश दिया कि पहले दिया गया अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा। साथ ही, बेंच ने सभी पक्षों को इस दौरान अपनी दलीलें पूरी करने की भी इजाज़त दी। इन मामलों में ग्राम पंचायत गल्हरी की याचिका के साथ-साथ दलजीत सिंह, अजय कुमार, गौरव प्रताप सिंह पठानिया और रविंदर पाल सिंह की याचिकाएं भी शामिल हैं। ये याचिकाएं राज्य भर में नदी के तल से गाद हटाने के काम को रोकने के लिए अलग-अलग सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दायर की गई थीं।
अंतरिम आदेशों के जारी रहने का मतलब है कि पंजाब सरकार और संबंधित अधिकारी मामले की सुनवाई टलने को ट्रिब्यूनल के पिछले आदेशों में लगाई गई शर्तों को नज़रअंदाज़ करने की मंज़ूरी नहीं मान सकते। उन आदेशों के दायरे में आने वाली किसी भी माइनिंग, ड्रेजिंग या गाद हटाने की गतिविधि के लिए लागू शर्तों का पालन तब तक करना होगा, जब तक ट्रिब्यूनल उनमें कोई बदलाव न करे या उन्हें रद्द न करे। ट्रिब्यूनल ने पहले 11 फरवरी के अपने अंतरिम आदेश में 2 अप्रैल को बदलाव किया था और राज्य को कड़ी शर्तों के साथ विवादित टेंडर नोटिस पर आगे बढ़ने की इजाज़त दी थी। इन शर्तों में 'सेडिमेंट मैनेजमेंट के लिए नेशनल फ्रेमवर्क', NGT के लागू निर्देश और 'सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस, 2016' का पालन करना शामिल था। अहम बात यह है कि ट्रिब्यूनल ने शर्त रखी थी कि उन नोटिसों के तहत ड्रेजिंग, गाद हटाने और रेत निकालने का काम गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ही होना चाहिए।
NGT ने पहले राज्य भर में लगभग 90 जगहों पर गाद हटाने के काम पर रोक लगा दी थी। यह रोक इस आधार पर लगाई गई थी कि जब तक इस गतिविधि के लिए पर्यावरण मंज़ूरी नहीं मिल जाती, तब तक नदियों से व्यावसायिक स्तर पर गाद हटाने का काम नहीं किया जा सकता। NGT के सामने शिकायत करने वालों का तर्क था कि राज्य द्वारा प्रस्तावित गाद हटाने (desilting) का काम असल में कमर्शियल माइनिंग जैसा है, जिससे नदियों की इकोलॉजी को खतरा हो सकता है।
कानूनी जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या बाढ़ से बचाव और नदी प्रबंधन के लिए गाद हटाने के नाम पर किए जा रहे कामों से रेत और नदी के तल में मौजूद अन्य चीज़ों का कमर्शियल स्तर पर खनन और बिक्री हो सकती है। इसलिए, जारी अंतरिम आदेश राज्य के ड्रेनेज और माइनिंग विभागों, ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों को नदी से गाद हटाने के प्रोजेक्ट्स को लागू करने से रोकते हैं। अगली सुनवाई में सभी पक्षों को अपनी दलीलें पूरी करने और ट्रिब्यूनल को इन मुद्दों पर आगे विचार करने का मौका मिलेगा। तब तक, 7 अक्टूबर का आदेश राज्य की नदियों में गाद हटाने पर लगी रोक को बनाए रखेगा।