Jalandhar.जालंधर: उपायुक्त आशिका जैन ने अधिकारियों को सटीक क्षति आकलन को प्राथमिकता देने और सभी संरचनाओं के पुन: उपयोग से पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए, उपायुक्त ने प्रत्येक उप-मंडल में संबंधित उप-मंडल अधिकारियों की अध्यक्षता में संयुक्त टीमों के गठन के आदेश दिए हैं। सभी संयुक्त टीमों को तुरंत काम शुरू करने और सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, जिसके बाद
संरचनात्मक प्रमाणीकरण
और क्षति आकलन, दोनों को शामिल करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इन टीमों में लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, पीएसपीसीएल, पंचायत विभाग, शिक्षा विभाग, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी और नगर निकायों के कार्यकारी अधिकारी शामिल होंगे।
जमीनी स्तर पर स्थिति की समीक्षा करते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, अस्पतालों, सार्वजनिक भवनों और निजी घरों का अनिवार्य तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा। संरचनात्मक प्रमाणीकरण के बाद ही उन्हें उपयोग के लिए उपयुक्त घोषित किया जाएगा। समय पर और उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी नुकसान का आकलन अधिसूचित एसडीआरएफ मानदंडों के अनुसार किया जाएगा। उपायुक्त ने उप-जिला अधिकारियों को प्रतिदिन समीक्षा बैठकें आयोजित करने, मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने और अंतर-विभागीय समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल भवनों का संरचनात्मक सुरक्षा निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए हैं। जैन ने भारी वर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए चब्बेवाल क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गाँवों हारटा और बडला का देर रात दौरा किया।
अपने निरीक्षण के दौरान, उन्होंने ब्यास नदी के किनारे हो रहे कटाव पर गंभीरता व्यक्त की और कहा कि अत्यधिक गाद और द्वीप निर्माण ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है, जिससे तेज़ धाराएँ सीधे तटबंधों से टकरा रही हैं। इससे रार्रा पुल (श्री हरगोबिंदपुर) के पास तटबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे पुल, गाँवों और भूमि को खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव को ब्यास नदी से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने और लगभग 13 किलोमीटर लंबे तटबंधों के निर्माण का प्रस्ताव प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तुत किया है। प्राकृतिक प्रवाह और जैव विविधता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह कार्य वन एवं वन्यजीव विभाग की देखरेख में किया जाएगा।
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