Punjab.पंजाब: अमृतसर की डिस्ट्रिक्ट लाइब्रेरी लंबे समय से अपने अस्तित्व और संचालन को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। फंडिंग की कमी और लाइब्रेरी की संरचना में लगातार हो रही तोड़-फोड़ ने इसे गंभीर संकट में डाल दिया है। स्थानीय समुदाय और पुस्तक प्रेमी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो अमृतसर की यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी बंद हो सकती है।
पुस्तकालय में मौजूद कई वर्षों पुरानी किताबें और दस्तावेज, जो शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा हैं, उचित रखरखाव और सुरक्षा की कमी के कारण खराब हो रहे हैं। कर्मचारी बताते हैं कि बजट की कमी के कारण नई किताबें खरीदने और पुरानी किताबों की मरम्मत कराना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, इमारत की हालत भी चिंताजनक है और छत और दीवारों में दरारें पैदा हो रही हैं।
पुस्तकालय के प्रमुख ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे पास संसाधनों की बहुत कमी है। फंडिंग पर्याप्त नहीं होने की वजह से हम न तो लाइब्रेरी का रखरखाव अच्छे से कर पा रहे हैं और न ही आम जनता को नई सुविधाएं प्रदान कर पा रहे हैं। अगर सरकारी मदद नहीं मिली तो यह संस्था गंभीर खतरे में है।”
स्थानीय पुस्तक प्रेमी और छात्र नियमित रूप से लाइब्रेरी का उपयोग करते हैं, लेकिन वे भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। एक छात्र ने कहा, “यहां हमारे लिए अध्ययन और शोध का सबसे अच्छा स्थान है। अगर यह लाइब्रेरी बंद हो गई, तो हमें शहर में पुस्तक और अध्ययन सामग्री की कमी का सामना करना पड़ेगा।”
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी फंडिंग और स्थानीय समर्थन के बिना सार्वजनिक पुस्तकालय लंबे समय तक अस्तित्व में नहीं रह सकते। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि डिजिटल संसाधनों और निजी दानदाताओं की मदद से लाइब्रेरी के संचालन को सुधारने के प्रयास किए जा सकते हैं।
हालांकि, हाल के वर्षों में लाइब्रेरी के रखरखाव में कमी के कारण भवन और सामग्री में काफी नुकसान हुआ है। कई पुस्तकें और दस्तावेज नष्ट हो गए हैं, जिससे न केवल स्थानीय इतिहास की जानकारी खतरे में है बल्कि शोध और अध्ययन के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वे स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं और जल्द ही लाइब्रेरी को बचाने के लिए योजनाएं तैयार की जाएंगी। हालांकि, कर्मचारियों और उपयोगकर्ताओं का कहना है कि कार्रवाई में देरी से यह प्रतिष्ठित संस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है।