चंडीगढ़। पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 20 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित पंजाब दौरे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया पर अमित शाह के दौरे का स्वागत करते हुए पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए मजबूत नेतृत्व तथा सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। अमित शाह के दौरे में नशे से प्रभावित परिवारों से मुलाकात का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

20 अक्टूबर को पंजाब पहुंचेंगे अमित शाह

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब का दौरा करेंगे।

उनका संगरूर, बटाला और मानसा जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान वे नशे और उससे जुड़ी घटनाओं से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर सकते हैं।

बिट्टू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए गृह मंत्री के दौरे का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि पंजाब के सामने नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की चुनौती है। इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

हालांकि, दौरे का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम और सभी मुलाकातों की अंतिम समय-सारिणी अभी स्पष्ट नहीं है।

रवनीत बिट्टू ने की निर्णायक कार्रवाई की अपील

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि पंजाब को नशे से मुक्त करने के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है।

उनके अनुसार, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने पंजाब के लोगों से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की।

बिट्टू ने कहा कि राज्य के सुरक्षित भविष्य के लिए लोगों को सामूहिक रूप से नशामुक्ति के अभियान पर भरोसा रखना चाहिए।

उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही जनता का विश्वास खो चुकी है।

यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है, जिस पर अंतिम फैसला मतदाताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में करना है।

नशे और कानून-व्यवस्था पर घिरी मान सरकार

पंजाब में हाल के दिनों में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से जुड़ी घटनाओं ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।

मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या और संगरूर जिले के दिड़बा में एक व्यक्ति की आत्महत्या की घटना को लेकर विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही है।

वहीं कांग्रेस भी राज्य में नशे, गैंगस्टर गतिविधियों और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना कर रही है।

हालांकि, इन घटनाओं में आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

अमित शाह ने भी उठाए थे गंभीर सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 16 अक्टूबर को पंजाब में नशे और संगठित अपराध के मुद्दे पर चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा था कि राज्य में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार, गैंगस्टर गतिविधियां और संगठित अपराध गंभीर चुनौती बन रहे हैं।

शाह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया था कि राज्य के नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।

उन्होंने मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या और दिड़बा की घटना का उल्लेख करते हुए संबंधित मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि पंजाब के लोग केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहते हैं।

गृह मंत्रालय ने मांगी पंजाब सरकार से रिपोर्ट

पंजाब में हुई हालिया घटनाओं के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने नशे से संबंधित घटनाओं और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

इस कदम को केंद्र और पंजाब सरकार के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा है कि नशे के अवैध नेटवर्क को समाप्त करने और अपराधियों को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इस बीच पंजाब सरकार के सामने संबंधित घटनाओं की जांच के साथ सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की चुनौती है।

भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर किया पलटवार

अमित शाह के बयान के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया।

मान ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार को भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र सरकार और भाजपा की आलोचना की।

इससे स्पष्ट है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

अकाली दल और कांग्रेस भी सरकार पर हमलावर

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी पंजाब की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

बादल ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी पंजाब में नशे और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।

कांग्रेस का आरोप है कि नशे के खिलाफ किए गए वादों के बावजूद समस्या बनी हुई है।

हालांकि, अलग-अलग दलों के इन आरोपों के बीच राज्य में नशा रोकने के लिए चल रहे अभियानों और उनके वास्तविक परिणामों का निष्पक्ष मूल्यांकन भी आवश्यक है।

भाजपा ने नशामुक्त पंजाब को बनाया चुनावी मुद्दा

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी नशामुक्ति के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।

इससे पहले 30 सितंबर को जालंधर में आयोजित भाजपा की नशामुक्त पंजाब यात्रा के समापन कार्यक्रम में अमित शाह ने राज्य को नशामुक्त बनाने का वादा किया था।

उन्होंने कहा था कि यदि भाजपा को पंजाब में सरकार बनाने का अवसर मिलता है, तो 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से मुक्त करने का लक्ष्य रखा जाएगा।

भाजपा ने संकेत दिया है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में नशे की समस्या उसका प्रमुख मुद्दा होगी।

युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

पंजाब में नशे की समस्या केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है। इसका संबंध युवाओं के स्वास्थ्य, परिवारों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा से भी है।

नशे की लत के कारण प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के साथ युवाओं को जागरूक करना और प्रभावी नशामुक्ति सेवाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

नशे के खिलाफ अभियान तभी स्थायी परिणाम दे सकता है, जब पुलिस कार्रवाई के साथ स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो।

अमित शाह के दौरे पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित पंजाब दौरे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अन्य राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने राज्य के लोगों से अपील की है कि वे नशामुक्त पंजाब बनाने के प्रयासों में सहयोग करें।

20 अक्टूबर के दौरे में नशे से प्रभावित परिवारों से प्रस्तावित मुलाकातों के माध्यम से उनकी समस्याओं को सामने लाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस दौरे के दौरान कोई नई केंद्रीय योजना या विशेष कार्रवाई की घोषणा की जाएगी या नहीं।

पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर जारी राजनीतिक संघर्ष के बीच अब केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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