भाजपा से नाराजगी के बीच अमरिंदर सिंह ने साफ किया रुख, बोले- पार्टी छोड़ने का सवाल नहीं
चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा से अपनी कथित नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के बारे में वह जो सोचते और महसूस करते हैं, उसे अपनी पार्टी भाजपा के सामने रखना उनका फर्ज है। इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि वह पार्टी छोड़ने जा रहे हैं। अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा कि वह इन दिनों एक “मुश्किल दौर” से गुजर रहे हैं, हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया।
84 वर्षीय अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को दिवंगत क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के जीवन पर आधारित पुस्तक के विमोचन के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। पिछले कुछ समय से वह पंजाब को लेकर भाजपा की रणनीति में उनसे सलाह नहीं लिए जाने पर असंतोष जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने करीब छह दशक पंजाब की राजनीति में बिताए हैं और इस लंबे अनुभव के आधार पर पार्टी को उनकी राय सुननी चाहिए।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि कुछ लोग पंजाब की राजनीति में बाद में आए हैं और उन्हें यहां काम करते हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इसके मुकाबले उन्होंने और उनके साथियों ने कई दशकों तक राज्य की राजनीति देखी है। पंजाब अलग-अलग दौर और परिस्थितियों से गुजरा है और उन्हें इन परिस्थितियों का लंबा अनुभव है। ऐसे में वह चाहते हैं कि भाजपा राज्य से जुड़े विषयों पर उनकी राय और अनुभव को महत्व दे।
उनकी इन टिप्पणियों के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या वह भाजपा से अलग होने पर विचार कर रहे हैं। अमरिंदर सिंह ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि अपनी पार्टी को अपनी राय बताने का अर्थ पार्टी छोड़ना नहीं है। उन्होंने साफ किया कि पंजाब के हालात को लेकर अपनी बात रखना उनका दायित्व है।
अमरिंदर सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में पार्टियां बदलती रही हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वह कांग्रेस से अलग होकर अकाली दल में गए थे और बाद में फिर कांग्रेस में लौटे। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अपनी राय रखने को किसी नई पार्टी में जाने के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस से अलग होने के बाद अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई थी। बाद में 2022 में उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय कर दिया और स्वयं भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद से वह भाजपा के साथ बने हुए हैं।
हाल के दिनों में उनकी नाराजगी की चर्चा इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि भाजपा में पंजाब से जुड़े मामलों में उनसे पर्याप्त सलाह नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंजाब की राजनीति में छह दशक बिताने के बाद उनके पास राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का लंबा अनुभव है।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनके साथ काम करने वाले कई लोगों ने भी लंबे समय तक पंजाब की चुनावी राजनीति देखी है। उनकी अपेक्षा है कि भाजपा उनके अनुभव से निकली राय को सुने और उसे महत्व दे। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने की किसी योजना से इनकार किया है।
इस बातचीत के दौरान अमरिंदर सिंह ने अपनी उम्र को लेकर भी दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह 84 वर्ष के जरूर हैं, लेकिन खुद को अभी बूढ़ा नहीं मानते। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का उदाहरण देते हुए अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखने के संकेत दिए।
उम्र को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अमरिंदर सिंह ने कहा कि अधिक उम्र अपने आप में सक्रिय राजनीति से दूर होने का कारण नहीं है। मोरारजी देसाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह अभी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने की स्थिति में हैं। हालांकि उन्होंने भविष्य में किसी पद या चुनाव को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं की।
इसी दौरान अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह इस समय “मुश्किल दौर” से गुजर रहे हैं। उन्होंने इस टिप्पणी का विस्तार नहीं किया और यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस संदर्भ में ऐसा कह रहे हैं। इसलिए उनके इस बयान के कारणों को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
उनकी हालिया टिप्पणियों के बाद पंजाब की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं जरूर बढ़ी हैं। विशेष रूप से भाजपा के भीतर अपनी भूमिका और राज्य की रणनीति में राय नहीं लिए जाने संबंधी उनके बयानों ने राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है। लेकिन अमरिंदर सिंह ने स्वयं स्पष्ट किया है कि उनकी आलोचना को भाजपा छोड़ने के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब से जुड़े मामलों पर पार्टी को अपनी बात बताना उनका अधिकार ही नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वह राज्य के मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखना चाहते हैं।
पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। ऐसे समय में अमरिंदर सिंह जैसे वरिष्ठ नेता की टिप्पणियां राजनीतिक चर्चा का विषय बन रही हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी दूसरी पार्टी में जाने की घोषणा नहीं की है और भाजपा छोड़ने की अटकलों को भी स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
फिलहाल अमरिंदर सिंह के बयान से इतना स्पष्ट है कि वह भाजपा में अपनी भूमिका और पंजाब के मामलों में अपनी राय को पर्याप्त महत्व दिए जाने की अपेक्षा रखते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि 84 वर्ष की उम्र के बावजूद वह खुद को सक्रिय राजनीति से बाहर नहीं मानते। उनके मुताबिक पार्टी के सामने पंजाब को लेकर अपनी बात रखना उनकी जिम्मेदारी है और इसे पार्टी छोड़ने की तैयारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।