शहरी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, केंद्र ने नौ मेट्रो परियोजनाओं को दी मंजूरी
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शनिवार को 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया (UMI) सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 का समापन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने देश में शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों की योजना तैयार करते समय परिवहन व्यवस्था को शुरुआत से ही उसका अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे भविष्य में बढ़ती आबादी और यातायात की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से शहरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में शहरों में परिवहन सुविधाओं का विस्तार केवल सड़कों और मेट्रो नेटवर्क के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और सुलभ यात्रा की सुविधा मिल सके।
तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित होगी परिवहन व्यवस्था
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, मनोहर लाल ने भविष्य की शहरी परिवहन व्यवस्था के लिए तीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर जोर दिया। इनमें एकीकरण (Integration), समावेशिता (Inclusiveness) और बुद्धिमत्ता (Intelligence) शामिल हैं।उन्होंने कहा कि इन तीनों सिद्धांतों को अपनाकर शहरों में बेहतर परिवहन नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।एकीकरण का उद्देश्य मेट्रो, बस, रेलवे और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को आपस में जोड़ना है, ताकि यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में परेशानी न हो।समावेशिता का मतलब ऐसी परिवहन सुविधाएं विकसित करना है, जिनका लाभ समाज के सभी वर्गों को मिल सके। वहीं, बुद्धिमत्ता के तहत आधुनिक तकनीक और डिजिटल समाधानों का उपयोग करके परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
नौ मेट्रो परियोजनाओं को मिली मंजूरी
सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने देश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 से अब तक केंद्र सरकार ने लगभग 174 किलोमीटर लंबाई वाली नौ मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी है।इन परियोजनाओं में 59,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है। यह निवेश देश के शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार से शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे और बड़ी संख्या में यात्रियों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।इसके साथ ही सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिल सकती है।
शहरों की योजना के साथ परिवहन को जोड़ना जरूरी
मनोहर लाल ने कहा कि शहरी परिवहन व्यवस्था को शहरों के विकास की योजना से अलग नहीं देखा जाना चाहिए।उनके अनुसार, जब किसी शहर के विस्तार या नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास की योजना बनाई जाती है, तो उसी समय सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों का भी आकलन होना चाहिए।इससे भविष्य में यातायात जाम, लंबी यात्रा अवधि और सार्वजनिक परिवहन की कमी जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शहरों को इस तरह विकसित किया जाए, जहां नागरिकों को अपने कार्यस्थल, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक आसानी से पहुंचने की सुविधा मिले।
तकनीक आधारित परिवहन समाधान पर जोर
सम्मेलन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी शहरी परिवहन के भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।डिजिटल टिकटिंग, यातायात प्रबंधन प्रणाली, स्मार्ट परिवहन नेटवर्क और विभिन्न परिवहन सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे उपाय यात्रियों की सुविधा बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।तकनीक आधारित समाधानों से यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने, समय बचाने और सार्वजनिक परिवहन का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन के समापन अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के भविष्य के शहरों के लिए मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था आवश्यक है।उन्होंने शहरी विकास और परिवहन योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत नौ मेट्रो परियोजनाओं और 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।सम्मेलन में सामने आए विचार भविष्य की शहरी परिवहन नीतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और नागरिकों के लिए बेहतर यात्रा सुविधाओं के विकास में उपयोगी साबित हो सकते हैं।