मयूरभंज। ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित प्रसिद्ध सिमलीपाल नेशनल पार्क रविवार, 1 नवंबर से एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटन के शौकीनों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने जशीपुर स्थित खैरी निवास में पार्क को दोबारा खोलने की औपचारिक शुरुआत की। इस बार पर्यटन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पर्यटकों को पार्क में प्रवेश करने के लिए ऑनलाइन परमिट लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटन प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन केवल 60 पर्यटक वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
सिमलीपाल नेशनल पार्क अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ियों, जलप्रपातों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह ओडिशा के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक जंगलों की प्राकृतिक खूबसूरती देखने और वन्यजीवों के बारे में जानने के लिए पहुंचते हैं। पार्क के दोबारा खुलने से पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
इस साल पार्क प्रशासन ने प्रवेश परमिट की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। पर्यटक आधिकारिक वेबसाइट www.similipal.org के माध्यम से अपना प्रवेश परमिट प्राप्त कर सकते हैं। इससे पर्यटकों को यात्रा से पहले प्रवेश की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही प्रतिदिन पार्क में प्रवेश करने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना भी आसान हो सकेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, सिमलीपाल नेशनल पार्क में प्रतिदिन अधिकतम 60 पर्यटक वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा। इनमें से 35 वाहन जशीपुर की ओर से कालीकाप्रसाद चेक गेट के माध्यम से प्रवेश कर सकेंगे। इन वाहनों के लिए प्रवेश का समय सुबह 5 बजे से सुबह 9 बजे तक निर्धारित किया गया है।
वहीं, बारीपदा की ओर से आने वाले पर्यटकों के लिए पीठाबाटा चेक गेट से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इस मार्ग से प्रतिदिन अधिकतम 25 वाहनों को अनुमति मिलेगी। यहां प्रवेश का समय सुबह 8 बजे से सुबह 9 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस प्रकार दोनों प्रवेश द्वारों से आने वाले वाहनों की कुल संख्या 60 तक सीमित रहेगी।
पर्यटकों के लिए प्रवेश समय का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण होगा। निर्धारित समय के भीतर चेक गेट तक पहुंचना आवश्यक है, क्योंकि प्रवेश की अनुमति तय समय सीमा के अनुसार दी जाएगी। ऐसे में दूरदराज से आने वाले पर्यटकों को यात्रा की योजना पहले से तैयार करनी चाहिए।
सिमलीपाल का वन क्षेत्र पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाघ, हाथी, हिरण और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। पार्क का प्राकृतिक वातावरण इसे वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है।
वन्यजीव पर्यटन के दौरान पर्यटकों की गतिविधियों को नियंत्रित करना आवश्यक होता है। जंगल में वाहनों की अधिक संख्या से शोर, प्रदूषण और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रतिदिन सीमित वाहनों को प्रवेश देने की व्यवस्था पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में सहायक हो सकती है।
पार्क में आने वाले पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य प्रमुख आकर्षण है। घने जंगलों से होकर गुजरने वाले रास्ते, पहाड़ी क्षेत्र और जलप्रपात पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। सिमलीपाल का बरेहीपानी जलप्रपात विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसके अलावा जोरांडा जलप्रपात भी क्षेत्र के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में शामिल है।
हालांकि, पार्क के भीतर किन पर्यटन स्थलों तक पहुंचने की अनुमति होगी, यह संबंधित वन विभाग के मौजूदा नियमों और मार्गों पर निर्भर करेगा। पर्यटकों को प्रवेश परमिट में निर्धारित शर्तों का पालन करना चाहिए।
सिमलीपाल के दोबारा खुलने से मयूरभंज जिले में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। जशीपुर और बारीपदा जैसे प्रवेश मार्गों के आसपास स्थानीय परिवहन, आवास, भोजन और अन्य पर्यटन सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे पर्यटन पर निर्भर स्थानीय लोगों को आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।
वन्यजीव पर्यटन का लाभ तभी टिकाऊ हो सकता है, जब प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसलिए पर्यटकों के लिए जंगल में प्लास्टिक और कचरा न फैलाना, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना तथा निर्धारित मार्गों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन परमिट व्यवस्था के लागू होने से प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। पर्यटक अपनी यात्रा से पहले परमिट की उपलब्धता देख सकेंगे और निर्धारित संख्या के अनुसार बुकिंग कर सकेंगे। हालांकि, प्रवेश शुल्क, वाहन संबंधी अतिरिक्त शर्तों और गाइड की उपलब्धता की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से जांचना आवश्यक होगा।
सिमलीपाल नेशनल पार्क का दोबारा खुलना ओडिशा के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। प्रकृति प्रेमियों को एक बार फिर इस समृद्ध वन क्षेत्र की सुंदरता देखने का मौका मिलेगा। फिलहाल पर्यटकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यही है कि वे पहले ऑनलाइन प्रवेश परमिट प्राप्त करें और निर्धारित समय पर संबंधित चेक गेट पहुंचें।