सुदर्शन पटनायक ने रेत कला से दी नीलाद्री बीजे और रसगुल्ला दिवस की शुभकामनाएं
Odisha ओडिशा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने अपनी अनोखी कला के जरिए नीलाद्री बीजे और रसगुल्ला दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पुरी समुद्र तट पर रेत से एक आकर्षक कलाकृति बनाकर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अंतिम अनुष्ठान को दर्शाया। सुदर्शन पटनायक ने अपनी रेत कलाकृति के माध्यम से ओडिशा की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को प्रदर्शित किया। उनकी बनाई गई कलाकृति में भगवान जगन्नाथ, रथ यात्रा और रसगुल्ले की परंपरा को दर्शाया गया, जिसने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया।
नीलाद्री बीजे भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा का अंतिम अनुष्ठान माना जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ यात्रा पूरी करने के बाद श्रीमंदिर में वापस लौटते हैं। ओडिशा में इस विशेष दिन को रसगुल्ला दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद मंदिर लौटते हैं तो देवी लक्ष्मी को मनाने के लिए उन्हें रसगुल्ला अर्पित किया जाता है। इसी परंपरा से रसगुल्ला दिवस जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ को विशेष भोग लगाया जाता है और श्रद्धालु उत्साह के साथ पर्व मनाते हैं।
सुदर्शन पटनायक अपनी रेत कलाकृतियों के जरिए देश और दुनिया के महत्वपूर्ण अवसरों, त्योहारों और सामाजिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेश दिए हैं।
पुरी में नीलाद्री बीजे के अवसर पर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन भगवान जगन्नाथ के भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं और इस ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बनते हैं। सुदर्शन पटनायक की रेत कला ने एक बार फिर ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है।