रायगडा। ओडिशा के रायगडा जिले के दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना को सड़क संपर्क की कमी के कारण झटका लगा है। जिले में प्रस्तावित 16 मोबाइल टावर साइटों पर काम में देरी हो रही है। इन स्थानों तक निर्माण सामग्री और टेलीकॉम उपकरण पहुंचाने के लिए पर्याप्त सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं होने से बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) की स्थापना का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

इन मोबाइल टावरों को केंद्र सरकार की डिजिटल भारत निधि (DBN) योजना के तहत स्थापित किया जाना है। योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं का विस्तार करना है, जहां अभी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की सुविधा कमजोर है अथवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जिन इलाकों को कनेक्टिविटी के लिहाज से सबसे अधिक जरूरत है, वहां तक पहुंचने के लिए बुनियादी सड़क सुविधा का अभाव ही अब परियोजना के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

16 प्रस्तावित साइटों पर काम प्रभावित

रिपोर्ट्स के अनुसार, रायगडा जिले में कुल 16 चिन्हित स्थानों पर मोबाइल टावर स्थापित किए जाने हैं। इन साइटों का चयन दूरदराज के गांवों और नेटवर्क सुविधा से वंचित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।

हालांकि, परियोजना को लागू करने वाली एजेंसी को इन स्थानों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर ऐसे रास्ते नहीं हैं, जिनसे भारी वाहन या निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहन आसानी से पहुंच सकें।

मोबाइल टावर लगाने के लिए केवल टावर का ढांचा ही पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए बेस ट्रांसीवर स्टेशन समेत कई तकनीकी उपकरण, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी सामान साइट तक पहुंचाना पड़ता है। सड़क संपर्क कमजोर होने के कारण यह पूरा काम प्रभावित हो रहा है।

PIA ने केंद्र को दी रिपोर्ट

यह मामला तब सामने आया जब प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसी (PIA) ने केंद्र सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित टावर साइटों तक पर्याप्त सड़क संपर्क नहीं होने के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।

एजेंसी के सामने सबसे बड़ी समस्या उपकरणों और निर्माण सामग्री को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की है। कई चिन्हित साइट ऐसे इलाकों में हैं जहां वाहन से पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में सामग्री को दूसरे माध्यमों से ले जाने की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण योजना

डिजिटल भारत निधि योजना के तहत देश के ऐसे क्षेत्रों में टेलीकॉम नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, जहां निजी कंपनियों के लिए व्यावसायिक रूप से नेटवर्क स्थापित करना कठिन होता है। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के लिए इस तरह की परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।

रायगडा जैसे आदिवासी बहुल और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ने से स्थानीय लोगों को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। मोबाइल सेवा उपलब्ध होने से आपात स्थिति में संपर्क, डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।

सड़क के अभाव में डिजिटल कनेक्टिविटी पर असर

मोबाइल टावर स्थापित करने की योजना का मकसद दूरदराज के गांवों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है, लेकिन सड़क संपर्क की कमी इस उद्देश्य में बाधा बन रही है। यह स्थिति बुनियादी ढांचे के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी निर्भरता को भी सामने लाती है।

यदि किसी गांव तक सड़क नहीं पहुंचती तो वहां बिजली, दूरसंचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट लागू करना भी मुश्किल हो जाता है। रायगडा की मौजूदा स्थिति इसी चुनौती की ओर संकेत करती है।

स्थानीय लोगों को नेटवर्क का इंतजार

प्रस्तावित टावरों के चालू होने से संबंधित क्षेत्रों के लोगों को बेहतर मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। लेकिन परियोजना में देरी के कारण ग्रामीणों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

दूरदराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की कमी का असर रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ता है। परिवारों को जरूरी संपर्क के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सहायता और सरकारी अधिकारियों से संपर्क में भी नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सड़क निर्माण पर भी ध्यान जरूरी

रायगडा में टावर परियोजना के सामने आई समस्या से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ सड़क जैसे बुनियादी ढांचे का विकास भी जरूरी है। यदि मोबाइल टावर लगाने वाली एजेंसियों को साइट तक पहुंचने में लगातार दिक्कत होती है तो निर्धारित समय में परियोजना पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है। दूरसंचार परियोजनाओं के लिए चिन्हित क्षेत्रों में सड़क की उपलब्धता, निर्माण सामग्री पहुंचाने के विकल्प और साइट तक पहुंचने के स्थायी रास्तों की पहले से समीक्षा की जा सकती है।

दुर्गम क्षेत्रों के लिए चुनौती

रायगडा जैसे भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करना सामान्य इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। पहाड़ी और वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, उपकरणों की आवाजाही और निर्माण कार्य के लिए विशेष योजना की आवश्यकता होती है।

फिलहाल 16 मोबाइल टावर साइटों पर काम की गति सड़क संपर्क की समस्या से प्रभावित है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए इन इलाकों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना सबसे जरूरी कदम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, रायगडा जिले में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना को जमीनी स्तर पर सड़क की कमी से चुनौती मिल रही है। डिजिटल भारत निधि के तहत प्रस्तावित 16 मोबाइल टावरों के लिए साइट तक निर्माण सामग्री और BTS उपकरण पहुंचाना मुश्किल हो गया है। अब परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए दूरसंचार और सड़क संपर्क से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

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