भुवनेश्वर। ओडिशा में चक्रवात 'अरनाब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने सोमवार को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में विशेष रूप से दक्षिणी और तटीय ओडिशा में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा किसी भी व्यवधान के बाद सेवा को जल्द बहाल करने पर जोर दिया गया। सरकार ने 26 से 29 अक्टूबर 2026 तक की अवधि को ध्यान में रखते हुए बिजली ग्रिड की मजबूती, आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति से जुड़े जोखिमों की समीक्षा की। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चक्रवात के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।

ऊर्जा विभाग की तैयारियों की समीक्षा

उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने सोमवार को ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें चक्रवात के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए विभाग की तैयारियों का जायजा लिया गया।

बैठक में दक्षिणी और तटीय जिलों में बिजली व्यवस्था को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।

चक्रवात के दौरान तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफॉर्मरों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।

इसी संभावना को देखते हुए अधिकारियों को पहले से जरूरी तैयारियां पूरी रखने और संभावित समस्याओं से निपटने के निर्देश दिए गए।

26 से 29 अक्टूबर तक महत्वपूर्ण अवधि

सरकार ने 26 से 29 अक्टूबर 2026 की अवधि के लिए बिजली विभाग की तैयारियों की विशेष समीक्षा की।

इस दौरान चक्रवात के संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क की स्थिति पर निगरानी रखने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।

बिजली आपूर्ति में व्यवधान होने पर मरम्मत कार्य तेजी से शुरू करने और प्रभावित क्षेत्रों में सेवा जल्द बहाल करने की तैयारी भी महत्वपूर्ण बताई गई।

बिजली ग्रिड को मजबूत करने के निर्देश

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बिजली ग्रिड की मजबूती बढ़ाने को कहा।

ग्रिड और वितरण नेटवर्क की सुरक्षा चक्रवात जैसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण होती है। तेज हवाओं और पेड़ों के गिरने से बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंच सकता है।

ऐसे में बिजली के खंभों, तारों और अन्य उपकरणों की स्थिति का आकलन करना जरूरी है।

सिंह देव ने बिजली कटौती को न्यूनतम रखने और आपूर्ति बाधित होने पर शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हालांकि बैठक में ग्रिड सुधार के लिए निर्धारित बजट या किसी विशेष नई परियोजना की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने पर जोर

बैठक में बिजली व्यवस्था से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

चक्रवात के दौरान क्षतिग्रस्त बिजली लाइनें और खुले तार लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में मरम्मत दलों की त्वरित तैनाती और सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक होता है।

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां बरती जाएं।

बिजली आपूर्ति बहाल करते समय कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

कोरापुट में रहकर निगरानी करेंगे उपमुख्यमंत्री

सरकार की जमीनी स्तर पर निगरानी रणनीति के तहत कनक वर्धन सिंह देव कोरापुट में रहकर चक्रवात के प्रभाव पर नजर रखेंगे।

वह दक्षिणी ओडिशा में आपातकालीन गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित जानकारी तेजी से जुटाना और जरूरत के अनुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

कोरापुट में उनकी मौजूदगी से स्थानीय प्रशासन और ऊर्जा विभाग के बीच समन्वय मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दक्षिणी ओडिशा में बिजली आपूर्ति बनाए रखना प्राथमिकता

दक्षिणी ओडिशा में चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए बिजली आपूर्ति बनाए रखना ऊर्जा विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

बिजली बाधित होने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

इसलिए बिजली वितरण व्यवस्था को सुरक्षित रखना और आपातकालीन मरम्मत की तैयारी करना महत्वपूर्ण है।

विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक सेवाओं को बिजली उपलब्ध कराने में प्राथमिकता दी जाए।

हालांकि किन जिलों में अतिरिक्त टीमों या उपकरणों की तैनाती की गई है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

आपातकालीन मरम्मत दलों की भूमिका महत्वपूर्ण

चक्रवात के दौरान बिजली के नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर मरम्मत दलों की भूमिका अहम हो जाती है।

प्रभावित स्थानों पर बिजली के खंभे दोबारा खड़े करने, तारों की मरम्मत और उपकरणों को सुरक्षित करने में समय लग सकता है।

इसलिए कर्मचारियों, वाहनों और आवश्यक उपकरणों को पहले से तैयार रखना उपयोगी होता है।

उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर आपातकालीन तैयारियों को प्राथमिकता दी जा रही है।

हालांकि मरम्मत दलों की कुल संख्या और उनकी तैनाती के स्थानों का विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।

आम लोगों की सुरक्षा पर भी ध्यान

चक्रवात के दौरान बिजली की लाइनों के पास जाना या गिरे हुए तारों को छूना बेहद खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों को क्षतिग्रस्त बिजली उपकरणों और तारों से दूर रहना चाहिए तथा ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए।

सरकार की तैयारियों में बिजली आपूर्ति को जल्द बहाल करने के साथ-साथ संभावित दुर्घटनाओं को रोकना भी महत्वपूर्ण है।

स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग के बीच समन्वय से आपात परिस्थितियों में सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

बिजली बहाली के लिए विभाग अलर्ट

ओडिशा सरकार ने ऊर्जा विभाग को संभावित चक्रवात के प्रभाव से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

ग्रिड की मजबूती, बिजली कटौती को कम रखने और मरम्मत कार्य तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव कोरापुट में रहकर दक्षिणी ओडिशा की स्थिति पर निगरानी रखेंगे।

चक्रवात 'अरनाब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बिजली आपूर्ति और आपातकालीन बहाली की तैयारियों को प्राथमिकता दी है। अब 26 से 29 अक्टूबर के दौरान मौसम की स्थिति और प्रभावित क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क की सुरक्षा पर नजर रहेगी।

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