बारीपदा। ओडिशा के मयूरभंज जिले में अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बारीपदा के भंजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक संदिग्ध कार का पीछा कर गांजे की बड़ी खेप जब्त की है। इस कार्रवाई में तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कार से करीब डेढ़ क्विंटल गांजा बरामद हुआ है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही कार और नकदी भी जब्त की है। घटना के बाद पुलिस अब इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
मिली जानकारी के अनुसार, भंजपुर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक कार के जरिए गांजे की बड़ी खेप दूसरे स्थान पर पहुंचाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम सक्रिय हो गई और संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने लक्ष्मीपोशी इलाके में केंद्रीय विद्यालय के पास सुवर्णरेखा नहर मार्ग पर वाहनों की जांच शुरू की। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के पंजीकरण नंबर वाली एक संदिग्ध कार दिखाई दी।
पुलिस ने कार को रोकने का प्रयास किया। रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध वाहन का पीछा करने के बाद पुलिस उसे पकड़ने में सफल रही। इसके बाद कार की तलाशी ली गई, जिसमें बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने वाहन में सवार तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। बाद में उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
कार से मिली गांजे की बड़ी खेप
इस कार्रवाई में पुलिस ने कार से एक क्विंटल से अधिक गांजा जब्त किया है। एक रिपोर्ट में इसकी मात्रा करीब डेढ़ क्विंटल बताई गई है। इसके अलावा लाखों रुपये की नकदी मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, जब्त गांजे का अंतिम वजन और नकदी की सटीक राशि के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है।पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया है। वाहन का पश्चिम बंगाल में पंजीकृत होना जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है और इसका इस्तेमाल कब से अवैध गतिविधियों में किया जा रहा था।इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल गांजे की खेप के स्रोत और उसके गंतव्य का है। तस्कर यह गांजा कहां से लेकर आए थे और इसे किस स्थान पर पहुंचाने की योजना थी, इसकी जांच जारी है।
तीन अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार
भंजपुर पुलिस की कार्रवाई में तीन संदिग्ध तस्करों को पकड़ा गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में उन्हें अंतरराज्यीय गांजा तस्करी से जुड़ा बताया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे। नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी में कई बार अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले लोग शामिल होते हैं। कुछ लोग माल की व्यवस्था करते हैं, जबकि अन्य लोग परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी संभालते हैं।हालांकि, इस मामले में ऐसे किसी संगठित नेटवर्क की पूरी संरचना का अभी खुलासा नहीं हुआ है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों की भूमिका क्या थी।
पश्चिम बंगाल नंबर की कार से तस्करी पर सवाल
जब्त वाहन का पश्चिम बंगाल का पंजीकरण नंबर होने के कारण पुलिस के सामने अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच का महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। हालांकि, केवल वाहन के पंजीकरण नंबर के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गांजा पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा था।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि कार किन मार्गों से होकर गुजरी थी। इसके अलावा आरोपियों की यात्रा से संबंधित जानकारी और उनके संपर्कों की पड़ताल से तस्करी के संभावित रास्तों का पता चल सकता है।मयूरभंज जिला भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। इसकी सीमाएं झारखंड और पश्चिम बंगाल से लगती हैं। ऐसे में अंतरराज्यीय परिवहन मार्गों पर निगरानी नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं गांजा तस्करी के मामले
मयूरभंज जिले में अवैध गांजा तस्करी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। सितंबर 2025 में बांगिरीपोसी पुलिस ने दो कारों से एक क्विंटल से अधिक गांजा जब्त कर छह लोगों को गिरफ्तार किया था।अक्टूबर 2025 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की भुवनेश्वर इकाई ने भी मयूरभंज जिले के करंजिया क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 171 किलोग्राम गांजा जब्त किया था। उस मामले में एक संदिग्ध तस्कर को पकड़ा गया था।इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि जिले में गांजा तस्करी की समस्या पहले से मौजूद रही है। हालांकि, तस्करी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए अलग-अलग वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना बड़ी चुनौती
अवैध गांजा तस्करी केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है। नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से युवाओं में नशे की लत फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में तस्करी के स्रोत, परिवहन मार्ग और वितरण नेटवर्क की पहचान करना आवश्यक है।भारत में गांजे से संबंधित अवैध गतिविधियां नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम के तहत दंडनीय हैं। बरामद पदार्थ की प्रकृति और मात्रा तथा आरोपी की भूमिका के आधार पर कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से गांजे की एक बड़ी खेप को आगे पहुंचने से रोकने में सफलता मिली है। हालांकि, मामले की जांच पूरी होने तक इसके पीछे सक्रिय लोगों की संख्या और नेटवर्क के विस्तार के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।
अब तस्करी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश
भंजपुर थाना पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जांच का मुख्य केंद्र गांजे की आपूर्ति और उसके संभावित खरीदारों की पहचान है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े गिरोह के लिए काम कर रहे थे या स्वयं गांजे की खरीद-बिक्री में शामिल थे।साथ ही जब्त वाहन और नकदी के संबंध में भी जांच महत्वपूर्ण होगी। मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।