अनुगोल : ओडिशा के अनुगोल जिले के छह गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। आधुनिक समय में जहां मोबाइल और इंटरनेट सुविधाएं जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, वहीं इन गांवों के लोग आज भी नेटवर्क सुविधा से वंचित हैं। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन संपर्क और सामाजिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।
मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे ये गांव अनुगोल जिले के पलालाहाडा ब्लॉक की झाराबेदा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आते हैं। प्रभावित गांवों में जाम्बुआ, गोइटासारेई, राइपाल, बनमुहाना, बाराबहली (1) और बाराबहली (2) शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से वे मोबाइल टावर और बेहतर नेटवर्क सुविधा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के कई जरूरी कामों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिवार के सदस्यों से संपर्क करना, सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना, ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करना और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े काम करना कठिन हो जाता है। कई बार लोगों को नेटवर्क की तलाश में गांव से बाहर या ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है।
सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को हो रही है। कोरोना महामारी के बाद शिक्षा व्यवस्था में ऑनलाइन माध्यमों का महत्व काफी बढ़ गया है। हालांकि इन गांवों के छात्र-छात्राएं ऑनलाइन कक्षाओं, डिजिटल अध्ययन सामग्री और इंटरनेट आधारित शैक्षणिक सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और वे आधुनिक शिक्षा प्रणाली से पीछे रह जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी मोबाइल कनेक्टिविटी की कमी गंभीर समस्या बन गई है। ग्रामीण इलाकों में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होने या किसी आपात स्थिति में अस्पताल, डॉक्टर या एंबुलेंस सेवा से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। कई बार समय पर सूचना नहीं पहुंच पाने के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में भी मोबाइल नेटवर्क की कमी का असर पड़ रहा है। रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क करने, विवाह संबंधों के लिए बातचीत करने और दूर-दराज के लोगों से संवाद स्थापित करने में कठिनाई होती है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में नेटवर्क सुविधा का अभाव उनके सामाजिक और आर्थिक विकास में बाधा बन रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया है। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मोबाइल टावर लगाने और नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कई बार आवेदन दिए, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र भौगोलिक रूप से दूरस्थ और वन क्षेत्र के आसपास होने के कारण निजी मोबाइल कंपनियां यहां नेटवर्क विस्तार में रुचि नहीं दिखा रही हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से भी इस समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि सरकार और दूरसंचार विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द गांवों में मोबाइल टावर स्थापित किए जाएं। उनका कहना है कि बेहतर नेटवर्क सुविधा मिलने से न केवल संचार व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना विकास की बुनियादी जरूरत बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं का विस्तार होने से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकता है।
सरकार की ओर से देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कई दूरस्थ इलाकों में अभी भी नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल टावर और इंटरनेट सुविधाओं का विस्तार करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
अनुगोल के इन छह गांवों के लोगों को उम्मीद है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब ध्यान दिया जाएगा और जल्द ही उन्हें मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा मिल सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और वे भी डिजिटल सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकेंगे।
फिलहाल इन गांवों के लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि मोबाइल नेटवर्क अब विलासिता नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन जरूरतों के लिए एक आवश्यक सुविधा बन चुका है।