Odisha: सरकार ने सभी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्य खरीद के निर्देश जारी किए
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न हो रहे ऊर्जा संकट को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों में आधिकारिक उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की खरीद को अनिवार्य कर दिया है।
इस संबंध में राज्य के वित्त विभाग ने 1 जून से लागू होने वाली विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार, अब सरकारी विभागों में पेट्रोल और डीज़ल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
गाइडलाइंस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उच्च संवैधानिक और प्रशासनिक पदों के लिए EVs की कीमत की सीमा तय की गई है। इसके तहत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, ओडिशा हाई कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों और मंत्रियों के आधिकारिक उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की अधिकतम कीमत 30 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
इसी तरह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी अलग-अलग मूल्य सीमा तय की गई है। चीफ सेक्रेटरी, डेवलपमेंट कमिश्नर, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी, एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर और समान रैंक के अन्य अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की अधिकतम कीमत 25 लाख रुपये तय की गई है।
सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य न केवल ऊर्जा संकट से निपटना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और राज्य में हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का हिस्सा है, जिसके तहत धीरे-धीरे सभी सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक विकल्पों में बदला जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ओडिशा को ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे ले जाएगा। हालांकि, शुरुआती चरण में इंफ्रास्ट्रक्चर और चार्जिंग सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता होगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, विभागों को निर्देश दिया गया है कि नई वाहन खरीद केवल निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर ही की जाए और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सभी विभागों को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और रखरखाव के लिए अलग से दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे।
राज्य सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
इस नीति के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में सरकारी परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे न केवल ईंधन खर्च में कमी आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य भी मजबूत होंगे।