भुवनेश्वर। ओडिशा में लगातार बढ़ते बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने महानदी के निचले इलाकों में आने वाले 10 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। शनिवार को हीराकुंड बांध के 22 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।
बाढ़ से राज्य के 20 जिलों में अब तक 8.34 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि बड़ी मात्रा में कृषि भूमि भी जलमग्न हो गई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार, महानदी के साथ-साथ कई अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि से राज्य के कई हिस्सों में हालात बिगड़े हैं। सलांगी, ब्राह्मणी, बैतरणी, जलका और बुढ़ाबलंग नदियों में उफान आने से उत्तरी ओडिशा के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
हीराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा खतरा
हीराकुंड बांध में पानी का दबाव बढ़ने के बाद शनिवार को 22 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। इसके बाद महानदी के निचले इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ा और कई गांवों में पानी घुस गया।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नदी किनारे बसे गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
20 जिलों में लाखों लोग प्रभावित
राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ का असर ओडिशा के 20 जिलों में देखने को मिला है। 8.34 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।
कई हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भर जाने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। धान और अन्य खरीफ फसलों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।
उत्तरी ओडिशा में 1,300 से अधिक घर क्षतिग्रस्त
अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी ओडिशा में सलांगी, ब्राह्मणी, बैतरणी, जलका और बुढ़ाबलंग नदियों में आई बाढ़ से 1,300 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है।
भद्रक जिला सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। इसके बाद जाजपुर, बालासोर और मयूरभंज जिलों में भी बाढ़ का व्यापक असर देखा गया है।
इन जिलों में कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमों और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। जिन क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, वहां से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी भी की जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
अधिकारियों ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को बाढ़ के पानी में जाने से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
मौसम विभाग और प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में किसी भी बदलाव के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।
बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी
ओडिशा में मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ना आम बात है, लेकिन इस बार कई नदियों में एक साथ पानी बढ़ने से हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, आवश्यक सेवाएं बहाल करना और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करना है।
फिलहाल महानदी और अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति के आधार पर बाढ़ की गंभीरता में बदलाव हो सकता है।