Odisha : रायगढ़ा में इंजीनियर रिश्वत लेते गिरफ्तार

Update: 2026-06-24 05:39 GMT

Odisha ओडिशा: रायगढ़ा जिले में विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी पर एक ठेकेदार से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। यह रिश्वत कथित तौर पर पेंडिंग बिल पास करने और टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आवश्यक ‘वर्क एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट’ जारी करने के बदले में ली जा रही थी।

गिरफ्तार अधिकारी की पहचान प्रसन्ना कुमार पटनायक के रूप में हुई है, जो रायगढ़ा के रूरल वर्क्स डिवीजन-I (RWD-I) में कार्यरत एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें 23 जून की देर रात रंगे हाथों उस समय पकड़ा गया जब वे ठेकेदार से रिश्वत की राशि स्वीकार कर रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, मामला तब सामने आया जब एक ठेकेदार ने विभाग से ‘वर्क एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट’ जारी करने का अनुरोध किया था, ताकि वह आगामी टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सके। आरोप है कि इसके बदले में अधिकारी ने पहले लगभग 50 लाख रुपये के लंबित बिल पास करने और सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 2.5 लाख रुपये की मांग की थी।

ठेकेदार द्वारा इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताने पर बातचीत के बाद आरोपी अधिकारी ने अपनी मांग घटाकर 2 लाख रुपये कर दी। इसके बावजूद ठेकेदार ने रिश्वत देने के बजाय इस पूरे मामले की शिकायत ओडिशा विजिलेंस विभाग से कर दी।

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने मामले की पुष्टि की और एक सुनियोजित जाल बिछाया। तय योजना के तहत ठेकेदार को आरोपी अधिकारी के पास भेजा गया, जहां जैसे ही 2 लाख रुपये की रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

विजिलेंस टीम ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम 2 लाख रुपये बरामद कर जब्त कर ली है। इसके अलावा, आरोपी अधिकारी से पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के अनुसार, प्रसन्ना कुमार पटनायक 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे। ऐसे में सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई यह गिरफ्तारी विभाग और प्रशासनिक तंत्र के लिए भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

विजिलेंस विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। विभाग ने कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

इस घटना के बाद राज्य के निर्माण और टेंडर सिस्टम में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी परियोजनाओं में ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच इस तरह की मिलीभगत विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों को प्रभावित करती है।

फिलहाल आरोपी अधिकारी से विस्तृत पूछताछ जारी है और विजिलेंस विभाग यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस तरह की गतिविधियां पहले भी की गई थीं या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं।

कुल मिलाकर, रायगढ़ा में हुई यह कार्रवाई ओडिशा विजिलेंस की एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है, जिसने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर सख्त निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है।

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